Month: April 2017

Z se Zero but Hero

Z se Zero but Hero

अंतिम अक्षर Z हूँ मैं, अंग्रेजी अल्फाबेट का, सीमा रेखा जैसे खड़ा हूँ,जैसे कोई देश का।। अंतिम हूँ अंतिम ना मानो, इंसानो की दुनिया में, पलभर को इंसान समझ लो, इंसानो की दुनिया में, बना हमी से जिसकी भैल्यु, दुनिया कहती जीरो है, जिसने क़द्र किया जीरो का, बन बैठा ओ हीरो है, अनयुजुअल कतार … Continue reading Z se Zero but Hero

Maa-Baap

Maa-Baap

कितना कष्ट होता है मिहनत से कमाने में, बिलकुल ही अनजान थे हम पापा के जमाने में। हो गयी है ज्ञान जो कहानी घटी मेले में, मेरी एक मुश्कान पर लुटायी पैसे मेले में, कितनी थी शरारतें कितनी ख्वाहिशें हमारी थी, मेले के सामान सारे नज़रों में उतारी थी, कंधे पे सवार जैसे मेला ही … Continue reading Maa-Baap

Jeevan Darshan

Jeevan Darshan

Kahaani (edhar-udhar se) एक गावँ में आम का एक बिशाल पेड़ था जिसके छावँ में एक बच्चा प्रतिदिन खेलने जाया करता था | वह प्रतिदिन उसके डाल से लिपट-लिपट कर झूला झूला करता | धीरे-धीरे बच्चे से उस अनबोलते बृक्ष को प्रेम हो गया |अब वह प्रतिदिन उस बच्चे का बेसब्री से इंतेजार करता.....प्रेम इंतज़ार … Continue reading Jeevan Darshan

yaaden

yaaden

अगर जिंदगी में कुछ खुशियां है,तो आपके दम पर, जिंदगी में जो गम है, वो कम है बस आपके दम पर | जिंदगी ग़मों का दरिया है,या सैलाब है खुशियों का, बहार है बसंती सी या, बिरानी है पतझड़ सा, जो कुछ भी है ओ सब है, बस आपके दम पर, अगर जिंदगी में कुछ … Continue reading yaaden

Kaisi Bebasi

Kaisi Bebasi

जश्न मना है मौत का ,क्रंदन से धरती-अम्बर डोला, लोकतंत्र की जड़े रक्त रंजित,ब्याकुल जन-मन बोला। कब तक शांत रहोगे तुम,शान्ति की बाते बोलोगे, जन मानस की कीमत कब तक,रेत बराबर तौलोगे, अश्रु की सैलाब में धरती का,आँचल अब भींग गया, हृदय विदारक चीख ने,अम्बर का भी सीना चिर गया, सहन की सीमा पार हुयी,ललकार … Continue reading Kaisi Bebasi

Naari ka Dard

Naari ka Dard

कैसा ये संसार किया है, जुल्म का सीमा पार किया है, तेरी बेटी,बहन सिसककर, तुम्हें जताने आयी है, बसकर जुल्म न सहना अब ये तुझे बताने आयी है, बसकर जुल्म न सहनाअब ये ......| युग बदला इंसान बदल गए, गीताज्ञान किताब में रह गए, पश्चिमवादी सोंच में अब तो, नारी के सम्मान बदल गए, देखो … Continue reading Naari ka Dard

Maa Bharti

Maa Bharti

हैं दोनों ही संतान मेरे, एक वे भी हैं एक तुम भी हो, हो दोनों ही अरमान मेरे एक वे भी हैं एक तुम भी हो। एक खून की होली खेल गए, जंजीर गुलामी तोड़ गए, माँ के आंसू के बदले में, हंसकर शूली पर झूल गए, एक रोज रुलाया करते हैं, अपनों पर हमला … Continue reading Maa Bharti