Ristey

Ristey

जब से है दुनिया जब से है हम,
हमसे है रिश्ते रिश्तों से हम,
बनते बिगड़ते जीवन में रिस्ते,
किसको कहें क्यों मिटते हैं रिस्ते,
दिमाग से बने रिस्ते कभी टिकते नहीं,
दिल से बनें रिस्ते कभी मिटते नहीं,
वैसे तो मिटानेवाले कुछ भी मिटा देते हैं,
पल भर में उजड़ा संसार बना देते हैं,
वर्षों का प्रेम क्या,वे निष्ठुर जिगर से,
दूध का फर्ज,माँ का दर्द भुला देते हैं,
दूध का फर्ज,माँ का दर्द भुला देते हैं ।
भूलने की आदत है वो भूल जाए,
चाहे ये रिस्ते सभी टूट जाए,
फिर एक रिश्ता जो याद सदा करती है,
तड़पते कलेजे में प्यार सदा रखती है,

क्यूंकि……….
माँ के पास दिल है दिमाग नहीं रखती,
इसीलिए बेटे को याद सदा करती है,
इसीलिए बेटे को याद सदा करती है.
माँ जैसा दुनिया में प्यार नहीं है,
माँ बिना प्यारा संसार नहीं है।

!!! मधुसूदन !!!

Riste

dimaag se bane riste kabhi tikte nahin,

dil se bane riste kabhi mitate nahin,

waise to mitaanewaale kuchh bhi mitaa dete hain,

dudh ka farz maa kaa dard bhulaa dete hain,

phir bhi o maa usey yaad sadaa rakhti hai,

tadpte kaleze men pyaar sadaa rakhti hai,

tadpte kaleze men pyaar sadaa rakhti hai,

kyunki…………..

maa ke paas dil hai dimaag nahi rakhti,

esiliye bete ko yaad sadaa karti hai,

esiliye bete ko yaad sadaa karti hai,

!!! Madhusudan !!!

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29 thoughts on “Ristey

  1. दिमाग से बने रिस्ते कभी टिकते नहीं,

    दिल से बनें रिस्ते कभी मिटते नहीं,
    umda wah bahoot accha

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  2. बहुत सार्थक । लेकिन अधूरी सी लग रही है।अंतिम पद्य में कुछ और जोड़ा जा सकता था।

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    1. हाँ—–दर्द और तरस खुदपर और उनसभी पर आता है—–जो दुखी और मजबूर होते हैं—-सुक्रिया आपको मेरी कविता पसंद आ रही है और समय निकल कर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं.

      Liked by 1 person

  3. बस एक बात को आपने शायद ध्यान नहीं दिया कि ये जो अपने को हाइ सोसाइटी का शो करते हैं, वो ही ये करते हैं। हम इस वक्त जहां रहते हैं वहाँ इसी तबके के लोग हैं

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    1. सच है संसार में सभी एक जैसे नहीं होते—–परन्तु अपवाद को छोड़ माँ माँ होती है—लोगों को किसी के द्वारा भी किया जानेवाला प्रेम का मूल्य समझना चाहिए, जो समझते है उन्हें बतलाने की कोई जरुरत ही नहीं। आपने अपने बिचार दिए —-पसंद किए अबौत बहुत धन्यवाद।

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  4. किटी इनका व्यसन, एक एक की दस दसकिटी। कैई 5, 10, 25हजार से कम की कोई नहीं। मेम्बर भी 20, या और ज्यादा। इनके बच्चे व मां बाप घर में हो या हॉस्टल में बस नौकर ही देखते हैं। हमारे ब्लॉग समय निकाल कर पढेंगे तो बस हमने अपने आस पास की घटनाएं व रहन सहन लिखा है। नवम्बर से

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    1. बिलकुल सच कहा आपने——दर्द होता है ऐसे सोच पर—-सबको उस स्थिति में जाना है फिर भी——बहुत बढ़िया—–सुक्रिया

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