Sainik Ki Lalkaar

Sainik Ki Lalkaar

हे भारत माँ के राजतिलक, पालक खुद का अपमान ना कर,
अब छदम युद्ध की ज्वाला में हम सैनिक को कुर्बान ना कर|

हम भारत माँ के पुत्र हैं इसके,
शान में कुछ भी कर जायें,
हम भूल के अपनों के हर गम,
खुद को न्योछावर कर जायें,
आजाद ,भगत हर एक सैनिक,
फौलाद जिगर हम रखते हैं,
दुश्मन को सबक सिखाने को,
हर वक़्त मौत से लड़ते रहते है,
हे जननायक, पालक मेरे तुम ऐसा कोई काम ना कर,
अब छदम युद्ध की ज्वाला में हम सैनिक को कुर्बान ना कर|

कोई माँ के आँख का तारा है,
पत्नी का कोई सहारा है,
कोई बहन की यादों में बसता,
कोई पुत्र छोड़ कर आया है,
है ख्वाब अलग,संसार अलग,
है भारत माँ का ज्वार अलग,
माँ ने बढ़ तिलक लगाया है,
पत्नी ने दीप दिखाया है,
अपनों का देखो जान हैं हम,
बसता तन में ओ प्राण हैं हम,
हम सब की याद दफ़न कर के,
खुद जान लुटाने आये हैं,
दुश्मन की जितनी साजिश है,
हम उसे मिटाने आये हैं,
गम है बिन जंग मिटजाने का तुम ऐसा ब्रत और ध्यान ना कर,
अब छदम युद्ध की ज्वाला में हम सैनिक को कुर्बान ना कर|

हम प्रेम पुजारी हैं जग का,
नफरत का हम ना बात करे,
जो आँख दिखाए हमको तो,
हम उसको कैसे माफ़ करें,
हम में बल बनकर जो बैठा,
हनुमान उसे हम कहते हैं,
हैं राम हमारे तन मन में,
भगवान् जिसे हम कहते हैं,
हे नायक अब तुम राम बनो,
हम बन हनुमान दिखा देंगे,
दुश्मन की प्यारी नगरी को,
पल भर में राख बना देंगे,
अब मौन छोड़ ललकार मुझे,बस और सहन अपमान ना कर,
अब छदम युद्ध की ज्वाला में हम सैनिक को कुर्बान ना कर|
अब छदम युद्ध की ज्वाला में हम सैनिक को कुर्बान ना कर|

!!! मधुसूदन !!!

 

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