Bibastaa

Image Credit :Google
लोकतंत्र है विवश सिसकता देख तड़पता मानव पर,
देख प्रतिभा झुलस रही है,जातिवाद के पावक पर।
भूखी नंगी लोग सड़क पर उड़ती गड्डियाँ ठुमकों पर,
तरस रहे हम छत को कब से नेता सोये मखमल पर,
राशन कार्ड और सब्सिडी को लूट लिए महलोंवाले,
दूध की नदियाँ सुख चुकी हर मोड़ खड़े मदिरावाले,
विकसित कैसा देश बना जनतंत्र सिसकता मानव पर,
देख प्रतिभा झुलस रही है,जातिवाद के पावक पर।
शिक्षा छोड़ के सबकुछ मिलता विद्यालय के आँगन में,
अंतर्द्वंद्व की आग लगी है लोकतंत्र के दामन में,
हम भाई सब साथ मगर नफरत की आग में जलते हैं,
पढ़ते दोनों साथ,एक जंजीर में जकड़े रहते है,
दौड़ ये कैसी सदियों से एक फूल पर दूजा काँटों पर,
देख प्रतिभा झुलस रही है जातिवाद के पावक पर।
गाँव हुआ बेहाल शहर में फ़ैल रही है उजियाली,
मरघट पर है कृषक-गाँव में फ़ैल रही है अंधियारी,
गाँव छोड़ सब भाग रहे हैं,शहर में अंधी दौड़ लगी,
भीड़ देख शहरों की सड़कें आह-आह है बोल उठी,
गाँव,शहर बेहाल कभी खुशहाल थे अपने चौखट पर,
देख प्रतिभा झुलस रही है,जातिवाद के पावक पर।

mqdefault

गाँव,शहर,निर्धन,शिक्षित संग कृषक,श्रमिक का हाल बुरा,
भूखे मरते लाखों बेबस हॉस्पिटल का हाल बुरा,
महलों की अम्बार लगी मिट रही झुग्गियाँ शहरों में,
भिखमंगो की फ़ौज बढ़ी मिट रही लालसा अश्कों में,
देख कोलाहल शोर जगत की हमें जगाया करती है,
शहर-गाँव की सड़कें-गलियाँ,दर्द सुनाया करती है,
तार दर्द के कितने छेड़ें,जुल्म बढ़ा ना मानव पर,
देख प्रतिभा झुलस रही है,जातिवाद के पावक पर।
!!!मधुसूदन!!!

Lokatantra hai vivash sisakata dekh tadapata maanav par,
dekh pratibha jhulas rahee hai,jaativaad ke paavak par.
bhookhee nangee log sadak par udatee gaddiyaan thumakon par,
taras rahe ham chhat ko kab se neta soye makhamal par,
raashan kaard aur sabsidee ko loot lie mahalonvaale,
doodh kee nadiyaan sukh chukee har mod khade madiraavaale,
vikasit kaisa desh bana janatantr sisakata maanav par,
dekh pratibha jhulas rahee hai,jaativaad ke paavak par.
shiksha chhod ke sabakuchh milata vidyaalay ke aangan mein,
antardvandv kee aag lagee hai lokatantr ke daaman mein,
ham bhaee sab saath magar napharat kee aag mein jalate hain,
padhate donon saath,ek janjeer mein jakade rahate hai,
daud ye kaisee sadiyon se ek phool par dooja kaanton par,
dekh pratibha jhulas rahee hai jaativaad ke paavak par.
gaanv hua behaal shahar mein fail rahee hai ujiyaalee,
maraghat par hai krshak-gaanv mein fail rahee hai andhiyaaree,
gaanv chhod sab bhaag rahe hain,shahar mein andhee daud lagee,
bheed dekh shaharon kee sadaken aah-aah hai bol uthee,
gaanv,shahar behaal kabhee khushahaal the apane chaukhat par,
dekh prati jhulash rahi hai jaatiwaad ke paawak par.
gaanv,shahar,nirdhan,shikshit sang krshak,shramik ka haal bura,
bhookhe marate laakhon bebas hospital ka haal bura,
mahalon kee ambaar lagee mit rahee jhuggiyaan shaharon mein,
bhikhamango kee fauj badhee aramaan tadapate ashkon mein,
dekh kolaahal shor jagat kee hamen jagaaya karatee hai,
shahar-gaanv kee sadaken-galiyaan,dard sunaaya karatee hai,
taar dard ke kitane chheden,julm badha na maanav par,
dekh pratibha jhulas rahee hai,jaativaad ke paavak par.
!!!Madhusudan!!!

Advertisements

41 thoughts on “Bibastaa

    1. जी अभय जी —मन में जो आया लिख दिया—-सभी हमारे ही भाई हैं— दर्द साफ़ दिखता है—भविष्य ठीक नहीं देश का—-परिवर्तन जरुरी है—-आपको अच्छा लगा बहुत बहुत धन्यवाद

      Liked by 1 person

  1. इसमें कोई शक नहीं—-भविष्य हम जरूर बदलेंगे——बहुत कुछ बदला भी है—– वैसे बर्तमान देखकर ही भविष्य का आकलन होता है—-सुक्रिया।

    Liked by 1 person

  2. जातिवाद के ऊपर जबरदस्त प्रहार है ये कविता
    शायद जातिवाद के रखवालो के लिए ऐसी कविता ही हिलोरें लेंगी तभी कुछ संभव है

    Like

    1. हम किसी से नफरत नहीं करते—-हम आधुनिक भारत के नागरिक है-जातिवाद करने की सोच भी नहीं सकते फिर जातिबाद का समर्थन कैसे करें। तारीफ़ करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आपका।

      Liked by 1 person

  3. “शिक्षा छोड़ के सबकुछ मिलता विद्यालय के आँगन में,☺
    अंतर्द्वंद्व की आग लगी है लोकतंत्र के दामन में”

    बहुत ही सुन्दर तरीके से बयां किया है आपने मधुसूदन जी।👌👍

    Liked by 1 person

  4. वाह ! सर जी वाह … देश की यथार्थ व्यक्त कर दिये इन पंक्तियों में …
    राशन कार्ड और सब्सिडी को लूट लिए महलोंवाले,
    दूध की नदियाँ सुख चुकी हर मोड़ खड़े मदिरावाले ।।

    Liked by 1 person

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

w

Connecting to %s