Urmila Patra of Ramayna

Urmila Patra of Ramayna

बैदेही की बहन उर्मिला, की मैं कथा सुनाऊँ कैसे,
चौदह वर्ष की बिरह,वेदना,त्याग,तपस्या गाउँ कैसे|
अभी-अभी तो गुलशन में आया बसंत का मेला था,
फूल बनी ओ खिली ही थी की,बिरह ने डाला डेरा था,
प्रियतम था यमराज बना, सन्देश सुनाने आया,
बिना प्राण के देह ये कैसा, समझाने था आया,
राम सिया के साथ लखन भी वन जाने को ठानी,
चौदह वर्ष की बिरह सोच ब्याकुल थी उर्मिल रानी,
सन्नाटे की शोर से हारी,भूत बनी थी खड़ी बेचारी,
साथ चलूंगी मना के हारी,प्रियतम की प्राणों से प्यारी,
झरझर बहते आंसू, पीड़ा,दर्द को मैं दिखलाऊँ कैसे,
चौदह वर्ष की बिरह,वेदना,त्याग,तपस्या गाउँ कैसे।

 

चैन महल ना वन में सुख,बना बिधाता कैसा क्रूर,
दोनों एक दूजे के नूर, फर्ज निभाते और दस्तूर,
बोझ बने कपडे,आभूषण,मौन सदा रहता ब्याकुल मन,
प्राणप्रिये की बिस्तर माटी,कुशा बिछौना सेज न भाति,
कंद-मूल जब पति हैं खाते,अन्न कैसे फिर मुख में जाते,
लखन का जंगल घर था जैसे, उर्मि महल बनाया वैसे,
एक-एक पल मुश्किल जीना,प्राण लखन का उर्मि सीना,
बिरह के पल होते हैं कैसे, मुर्ख हूँ मैं कोई बिरहन समझे,
चौदह वर्ष बिरह के कैसे, कटते कोई सती ही समझे,
बिन आंसू के नयन थे कैसे,ह्रदय की ज्वार दिखाऊं कैसे,
चौदह वर्ष की बिरह,वेदना,त्याग,तपस्या गाउँ कैसे|

 

ख़ुशी मनाते नगर के सारे,बुढ्ढे,बच्चे,नर-नारी,
सीता,राम लखन थे आये, झूम रहे थे नर-नारी,
चौदह वर्ष अमावस गुजरी,लौट के आयी खुशहाली,
उर्मि देख रही तन दर्पण, चौदह वर्ष की बदहाली,
रामायण ना कोई ऐसा बिरह नहीं उर्मिला जैसा,
शब्द नहीं ना ज्ञान की नजरें,तड़प को मैं दर्शाऊँ कैसे,
चौदह वर्ष की बिरह,वेदना,त्याग,तपस्या गाउँ कैसेI

 

नारी का सम्मान जहां,ईश्वर का वहीँ पर डेरा है,
नारी का अपमान जहां पर रहता भुत का डेरा है,
त्याग, प्रेम से भरी किताबें,सतयुग,द्वापर,त्रेता,
ईश्वर भी नतमस्तक उसका कोई लेख न लेखा,
मैं तो हूँ नादान अभी मैं,त्याग,प्रेम दिखलाऊँ कैसे,
चौदह वर्ष की बिरह,वेदना,त्याग,तपस्या गाउँ कैसे|
बैदेही की बहन उर्मिला,की मैं कथा सुनाऊँ कैसे ||

!!! मधुसूदन !!!

Advertisements

25 thoughts on “Urmila Patra of Ramayna

    1. उर्मिला सीता की बहन और राम के भाई लक्ष्मन की पत्नी थी जिसने चौदह वर्ष पति के वियोग में खुद को जंगल के निवासी की भाति महलों में रहना खाना आरम्भ करने के साथ साथ माताओं को सम्हालने में दिल में आपार दर्द होने के बावजूद आँखों में आंसू नहीं आने दी जिसकी तुलसीकृत रामायण में बहुत ही कम चित्रित किया गया है।

      Liked by 1 person

    1. तुलसी कृति रामायण में कम वर्णन है। लेकिन किसी ने रामायण में उर्मिला का कम वर्णन होने से आलोचना कर उर्मिला का ही वर्णन किया है। मुझे उस राइटर का नाम याद नहीं आ रहा है।

      Like

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s