Kaisi Jindagi 

Kaisi Jindagi 

आज भी ओ महक तेरी, याद बहुत आती है,
स्वेत बस्त्रों में लिपटी,अरमान सुलग जाती है।

तुम हो तो,साड़ी,गहने और कपडे है,
दुनिया की तुमसे ही,सभी मेरे सपने है,
जानती थी पर,किश्मत ना जान सकी,
साबित्री थी मैं ना,खुद को पहचान सकी,
क्या करें मजबूर थी,तुमसे कोसो दूर थी,
आज सब कुछ तो है,बस तुम ही नहीं है,
साड़ी, गहने और कपड़े,आज भी वही है,
यकीन नहीं तो आ साड़ी,गहनों को देख ले,
दुल्हन बनी कैसी,आलमारी को देख ले,
मुझपर तो आज देख,स्वेत रंग चढ़े हैं,
आलमीरा,दराज मेरे,किश्मत पर हंसे हैं,
देखती हूं गहने जिसे,तूने कभी छुआ था,
साडी के पल्लू में,तेरा ही ख्वाब बुना था,
खोलूं मैं अलमीरा कैसे,दराज वो रुलाती है,
आज भी ओ महक तेरी,याद बहुत आती है।

ख्वाबों में कैसे,मैं मुश्कुरा लूँ,
कैसे मैं पल भर भी,तुमको भुला दूँ,
आँगन में,कोठे पर,देहरी और बिस्तर पर,
दर्पण में तेरी,तस्वीर नजर आती है,
आज भी ओ महक तेरी,याद बहुत आती है।
स्वेत बस्त्रों में लिपटी,अरमान सुलग जाती है।।

!!! Madhusudan !!!

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25 thoughts on “Kaisi Jindagi 

  1. बहुत ही अच्छा लिखा है। एक से एक कवि हैं। मेरे जैसे मूर्खता कवि को लगता रहा है लेखनी की दुनिया में मैदान छोड़ घर में डायरी ही लिखना बेहतर है। जहां न लाइक न कॉमेट की जवाब देही न काल्पनिक दुनिया बस मुक्त भाव से लिखते जाओ।

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    1. नहीं नहीं आप भी बहुत बढ़िया लिखती हैं—-आपने बहुत ऊंचा बोल दिया ,अभी तो मैं सिख रहा हूँ। आपने पसंद किया कोटि कोटि आभार।

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    1. ये तो अपनी अपनी सोच है ।आपने पसंद किया अपना कीमती समय देकर प्रतिक्रिया ब्यक्त किया बहुत बहुत धन्यवाद आपका।

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      1. आपने इतना सराहना किया ,कोटि कोटि धन्यवाद ज्योती जी–वैसे हम सब एक परिवार की तरह एक दूसरे का सराहना करते है अच्छा है ।अगर कोई पोस्ट अच्छा ना लगे तो बताया जाए तब वो क्षण अतिउत्तम होगा। धन्यवाद।

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  2. रजनी जी का कमेंट बहुत ही अच्छा है।कभी कभी इन likes से दूर।और सर आपकी तारीफ क्या करें हर रचना एक से बढ़कर मोतियों सी खूबसूरत।

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    1. क्या बात—इतनी तारीफ ये आपका सोच और बड़प्पन है। ऐसे ही प्रेम बनाये रखिये—-बहुत बहुत आभार आपका।

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