Titliyon si Jindgi

Titliyon si Jindgi


मेरी भी जीवन तितलियों सी होती,
चंचलता के संग में संजीदगी भी होती।।

खूबसूरती से फिर हम सबको लुभाते,
रंग-बिरंगी दुनियाँ को हम भी बनाते,
निगाहें शराबी अदाओं के संग-संग,
थोड़ी सी हम मे शरारत भी होती,
मेरी भी जीवन तितलियों सी होती।।

फूलों की खुशबु में हम भी नहाते,
गुलशन में हम भी उनको लुभाते,
मगर छल,कपट, द्वेष,घृणा के संग-संग,
नफरत के बदले दया हममे होती,
मेरी भी जीवन तितलियों सी होती।।

तितलियों सी दुनियाँ हमारी भी होती,
मेरी भी सोच काश लंबी ना होती,
नहीं जात होता नहीं धर्म होता,
कहीं भी जमाने में शरहद ना होता,
ये नेता ना होते ये संसद ना होती,
सारा जहाँ एक गुलशन सी होती,
मेरी भी जीवन तितलियों सी होती।।

सूरज जमाने में फिर ना धधकता,
हवाओं में ऐसे जहर भी ना रहता,
नदियों का पानी विषैला ना होता,
सपनों की दुनियां मरघट ना होता,
जंगल भी होता, सभी जीव होते,
कृत्रिम के पौधे जमीं पर ना होते,
हवाओं में खुशबू बहारों में होती,
मेरी भी जीवन तितलियों सी होती।
चंचलता के संग में संजीदगी भी होती।

!!! मधुसूदन !!!

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25 thoughts on “Titliyon si Jindgi

  1. काश ऐसा हो पाता….👌
    सूरज जमाने में फिर ना धधकता,
    हवाओं में ऐसे जहर भी ना रहता,
    नदियों का पानी विषैला ना होता,
    सपनों की दुनियां मरघट ना होता,
    जंगल भी होता, सभी जीव होते,
    कृत्रिम के पौधे जमीं पर ना होते,
    हवाओं में खुशबू बहारों में होती,
    मेरी भी जीवन तितलियों सी होती।
    चंचलता के संग में संजीदगी भी होती।
    अद्धभुत पंक्तियों की जुगलबंदी…………..💐

    Liked by 1 person

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