Month: June 2017

Apno ka Pyaar

Apno ka Pyaar

अपने हो सफर में तो,थकन नहीं होता, बिन अपनों के सफर,में जशन नहीं होता, मंजिल की चाह तो,मंजिल मिला देती है, गैरों के बीच मगर जशन नहीं होता, याद मैं भी आऊंगी मंजिल पाने के बाद, क्या हंस पाओगे हमसे,दूर जाने के बाद, सह नहीं पाऊंगी दर्द,मैं भी जुदा होकर, रह पाओगे क्या मेरे मिट … Continue reading Apno ka Pyaar

Nafrat Ka Khel

Nafrat Ka Khel

मिलकर दुर्गंध मिटा देंगे,धरती तो जन्नत सा होगा, जिह्वा जिनकी जहर भरी,उस दानव का फ़िर क्या होगा? हम मुर्ख हैं हम अज्ञानी हैं, हम लापरवाही करते हैं, अपनी सुन्दर सी धरती को, सच है गन्दा हम करते हैं, पर देश से नफरत नहीं हमें, है नाज हमें उन सैनिक पर, वे गोली खाते रहते हैं, … Continue reading Nafrat Ka Khel

Kisaan aur Mansoon

Kisaan aur Mansoon

मानसून हर बार कडा एक्जाम लेता है, मज़बूरी है कृषक का सीना तान लेता है| ग्रीष्म का तांडव देख के, धरती का भी फटा कलेजा था, जीव,जंतु संग मानव पर भी, मौत ने डाला डेरा था, इंतजार अब ख़त्म मेघ बौछार करता है, मज़बूरी है कृषक का सीना तान लेता है| सूखे चारे खा खाकर … Continue reading Kisaan aur Mansoon

Prem Pujari

Prem Pujari

परी नहीं हो इंद्रलोक की, ​चाह ना फूलकुमारी का, चाहत है ना चाँद का मुझको, तुम बिन जीना प्यारी क्या, जब तक तू है साथ में मेरे, तू हमसफ़र हमारी है, तब तक कविता गान करेंगे, जबतक जान हमारी है। उपवन में हैं फूल खिले, मकरंद भ्रमर को भाते हैं, महक पुष्प की भौरों को … Continue reading Prem Pujari

Chand

Chand

मजहब है ना चाँद का कोई, हम सब की मजहब में चाँद, जिसकी जैसी आँखें वैसी, आँखों में दीखता है चाँद। कोई कहता चन्दा मामा, कोई कहता दूज का चाँद, करवाचौथ के व्रत को तोड़ा, थाल में देखी जब वो चाँद, राजा दक्ष के चाँद जमाई, शीश शुशोभित शिव-शम्भू, सारे जग को शीतल करता, तू … Continue reading Chand

Eid Mubarak

Eid Mubarak

एक माह की कठिन तपस्या,होती है रमजान में। सुना है तेरी बरकत सब पर,होती है रमजान में, रोजे के इस पाक महीना, ईद मिलन की बेला में, कहाँ छुपा मेरे भगवन तू, दुनियाँ के इस मेला में, ऐ अल्लाह अगर तू रब है, तू ही ईश्वर और भगवान्, आकर देख धरा पर कैसे, उलझ गए … Continue reading Eid Mubarak

Araadhnaa

Araadhnaa

बिन मांगे सब देनेवाले, मैं सेवक तूं स्वामी है, क्या मांगू क्या तुझे बताऊँ, तुम तो अंतर्यामी है। तुमसे मैं हूँ,मुझमे तू है, मेरे सुख-दुःख में भी तू है, पल-पल की है खबर तुम्हें, ये तेरी प्रेम की प्यासी है, क्या मांगू क्या तुझे बताऊँ, तुम तो अंतर्यामी है।1 निराकार तू घट-घट में, आकार धरे … Continue reading Araadhnaa