Khwahishen

Khwahishen

बिखर कर संवरना,संवरकर बिखरना,
मुश्किल है हर ख्वाहिशों का संवरना,
बिखरते हो सच में तुम फूलों के जैसे,
मगर ख्वाहिशें तुम कभी गम ना करना।

तुम्हीं से सजी है जीवन हमारी,
जमीं पर कदम आसमां से है यारी,
चिड़ियों की पंखें भी झड़ती,संवरती,
मगर आसमां में चिड़ियां ही उड़ती,
चिड़ियों ने हमको उड़ना सिखाया,
ख्वाहिश तुम्हीं ने सपने दिखाया,
तुम से सजी है गुलशन हमारी,
फूलों के संग-संग कांटे भी प्यारी,
संकट है सच में मगर ना ठिठकना,
ख्वाहिशें हमारी कभी गम ना करना।

तुम्हें बंधनों में जकड़ना है मुश्किल,
चाहत को तेरी समझना है मुश्किल,
संवरते हो हम भी संवरते हैं संग में,
बिखरते हो तुम फिर सम्हलना है मुश्किल,
मगर तितलियों सी हवा में तू रहना,
ख्वाहिशें हमारी कभी गम ना करना।
!!! मधुसूदन !!!

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26 thoughts on “Khwahishen

  1. ख्वाहिशें तेरी कोई बंदिश नहीं
    हर पल नए रूप में मिलती है तू
    जो ना देखूं तेरी ओर मैं कभी
    इतरा कर मुझपर हंसती है तू
    कितना भी तुझे नज़रंदाज़ करूँ
    हर राह पर क्यों संग चलती है तू …?

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    1. सुक्रिया बहुत खूब——-
      भूल कर भी मुझे तू भूल नहीं पाया,
      झूठ भी तुम्हें बोलना नहीं आया,
      मैं तो ख्वाहिश तेरे साथ ही रहती हूँ,
      मुझे छोड़ तुझे जीना नहीं आया,
      आँखों में काजल,होठों पे लाली,
      हम संग है साथ पायल तुम्हारी,
      दिल में जो गम हैं,आँखें जो नम हैं,
      ख्वाहिश बिना नहीं चलते कदम हैं,
      बिचलित होते नजरअंदाज नहीं करते,
      हर राह पर हम तुम साथ हैं चलते।

      Liked by 2 people

  2. बहुत खूब….
    ख्वाहिशोंं से मुकम्मल ये जहाँ है,
    धरती से फलक तक इन ख्वाहिशों का कारवां है।

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