DARD

DARD

कोमल फूल सी एक कलि, मखमल के गलीचे को रोज भिगोती,
दारुण दर्द छीपे दिल में,सब रात अँधेरी उजागर होती|
बादल भी गरजे,बरसे,
नदियाँ मिली बाँध को तोड़ी समंदर,
देहरी बाँध न लांघ सकी,
अबला ना गरज दिल खोल के रोती,
प्रेम मगन दिन सास,ससुर संग,
रात अँधेरी में सेज भिगोती,
दारुण दर्द छीपे दिल में सब, रात अँधेरी उजागर होती |

यौवन ऐसी की चाँद मलिन सी,
मृगनयनी के नयन भी हैं फीके,
कान थके ना सुने सुर कोयल,
मोती छीपे दोउ होठ के पीछे,
काली घटा सी केश कमर तक,
तिल शुशोभित होठ के नीचे,
काजल छोड़ ना एक श्रृंगार,
मलिन मगर शशि रूप के पीछे,
ताकी छबि को निहारत बैठी,
बिहंग को देख के नूर ये बोली,
ऐ चिड़ियाँ तू हंसी जग सुन्दर,
मेरी जहां सी उदासी ना होती,
तेरी जहां उन्मुक्त गगन ,
उड़ती प्रियतम संग रात में सोती,
देखन तो अंधियारे में आ,
मृगनैनी सी आँखों की हालत कैसी,
दारुण दर्द छीपे दिल में,सब रात अँधेरी उजागर होती |

उत्सुक जोड़े बिहंग झरोखे पे,
रात निहारत चाँद को ऐसे,
काली घटा बिजली चमके,
बरसे जस सेज पे नार वो वैसे,
छाती धरा सी फटी रिसती,
बहती दरिया अखियन को डुबोती,
काजल आँख की डोर बनी,
दोउ गाल पे आसूं की मोती पिरोती,
बालम छोड़ बिदेश बसे,
कुहुन्की बिरहन निस रात को रोती,
देखि दशा सब हाल समझ,
दिल फाड़ बिहंग भी साथ में रोती,
हूँ खुशहाल मैं, ऐ बिरहन सच,
तेरी जहां सी उदासी ना होती,
फूल सी कोमल एक कलि,मखमल के गलीचे को रोज भिगोती|
दारुण दर्द छीपे दिल में,सब रात अँधेरी उजागर होती |

!!! मधुसूदन !!!

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27 thoughts on “DARD

  1. मधुसूदन जी, आपकी कविता दर्द पढ़ी, बहुत अच्छी लगी, दर्द को कविता के रूप में गहरा अभिव्यक्त किया है आपने,

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    1. सुक्रिया सुधीर जी आपको हमारी कविता पसंद आयी—–बहुत बहुत धन्यवाद।

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    1. सुक्रिया दानिश जी —–आपके हौसला भरे शब्दों ने मुझे काफी उत्साहित किया–धन्यवाद आपका।

      Liked by 1 person

  2. Aap kamaaal ka likhte h, chaahe jis ras me likhe aaap… Mera shabdkosh kaafi seemit h, Mai bhi likhna chahta Hu par bhaaw shabdon ko bhulaa dete hai, aur aaap shabdon k baandh me har bhaaw ko smbhal kete h….aap acche h, mujhe b margdarshan de…
    Ek baat aur Maine bahut kam Hindi kavitaon ko padhaa h par aapki kvitaye acchi h.

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    1. Sukriya Sunny ji aapko meri kavitaayen achchhi lagti hai…Abhaar aapka.English ki tarah hindi me kavitaayen likhte hain.kuchh bhi likhne ke pahle ek bhaav ho fir likhen aur khud padhen aur sudhaar kar post karen…Pasand dusron par chhod de …Dhire dhire nikhaar aate jaayega aur shabdkosh bhi badh jaayegaa. Sukriya aapkaa…

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