Kalpna ki Udaan

Image Credit : Google.
धरती बन गयी कोरा कागज,
सागर बना स्याही,
क्या लिखूं मैं प्रेम में तेरे,
बोल मेरे हमराही।
किन गुणों का गान करूँ मैं,
नख से शिख तक तेरे,
मेरे दिल में झांक के देखो,
तुम ही तुम हो मेरे,
केश तुम्हारे काले बादल,
मतवाले से रहते,
अपने संग संग मेरे मन को,
मतवाला सा करते,
गर्म हवा शीतल बन जाता,
गेसू से टकराता,
भींगे केश बदन को लगते,
मन ब्याकुल हो जाता,
दिखती तेरी जुल्फों में ही,
खिली हुयी फुलवारी,
क्या लिखूं मैं प्रेम में तेरे,
बोल मेरे हमराही |1
बालों के लट जैसे परदे,
अंदर चाँद चमकता,
जैसे बिजली आसमान में,
वैसे रूप दमकता,
शब्दरहित गुणगान करें क्या,
कर्ण सुशोभित कुण्डल का,
भौं की मैं गुणगान करूँ या,
भाल-तिलक मनमोहक का,
कोमल लाल कपोल सुशोभित,
अधरतले तील मतवाला,
बड़ी-बड़ी आँखें कजरारी,
होठ गुलाबी मधुशाला,
आँख शरबती,केश घटा,
तू मय की भरी प्याली,
क्या लिखूं मैं प्रेम में तेरे,
बोल मेरे हमराही ।2
गर्दन जैसे एक सुराही,
हिरनी जैसी चाल,
कटि लचकती ऐसे जैसे,
लवंग की पतली डाल,
बोल सुरीली सुन सब खोया,
हाथ हवा में लहराती,
कोयल दूर से तुझे निहारे,
गीत मधुर जब गाती,
चाल देख नख लाल तुम्हारे,
हंस भी तुमपर दिल हारे,
रूप तुम्हारी संगमरमर सी,
फूल सी कोमल तन प्यारे,
नख से शिख सौंदर्य छलकती,
तू है जान हमारी,
क्या लिखूं मैं प्रेम में तेरे,
बोल मेरे हमराही |3
प्रेम अगर हो दिल में तो,
रब पत्थर में भी मिल जाता,
प्रेम अगर इंसा के दिल,
जग जन्नत सा दिख जाता,
जन्नत में भी बिना प्रेम के,
दाग नजर आ जाता है,
प्रेम अगर तो अंधे में,
भगवान् नजर आ जाता है,
मैं तो पगला दृष्टिहीन,
है तूँ ही नयन हमारी,
क्या लिखूं मैं प्रेम में तेरे,
बोल मेरे हमराही,
क्या लिखूं मैं प्रेम में तेरे,
बोल मेरे हमराही।।4
!!! मधुसूदन !!!

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dharatee ban gayee kora kaagaj,
saagar bana syaahee,
kya likhoon main prem mein tere,
bol mere hamaraahee |
kin gunon ka gaan karoon main,
nakh se shikh tak tere,
mere dil mein jhaank ke dekho,
tum hee tum ho mere,
kesh tumhaare kaale baadal,
matavaale se udate,
apane sang sang mujhako bhee vo,
matavaala sa karate,
garm hava sheetal ban jaata,
kesh se jab takaraata,
bheenge kesh badan ko lagate,
man byaakul ho jaata,
teree julphon mein hee dikhatee,
khilee huyee phulavaaree,
kya likhoon main prem mein tere,
bol mere hamaraahee |1
baalon ke lat parade jaise,
chaand chamakata andar se,
jaise bijalee aasamaan mein,
roop chamakata darpan se,
shabdarahit gunagaan karen kya,
karn sushobhit kundal ka,
bhaun kee main gunagaan karoon ya,
bhaal tilak manamohak ka,
komal laal kapol sushobhit,
adharatale teel matavaala,
badee-badee aankhen kajaraaree,
hoth gulaabee madhushaala,
aankh sharabatee,kesh ghata,
too may kee bharee pyaalee,
kya likhoon main prem mein tere,
bol mere hamaraahee |2
gardan jaise ek suraahee,
chaal tumhaaree matavaalee,
kati lachakatee aise jaise,
lavang kee patli daalee,
bol sureelee sun sab khoya,
haath hava mein laharaatee,
koyal door se tujhe nihaare,
geet madhur jab gaatee,
chaal dekh nakh laal tumhaare,
hans bhee tumapar dil haare,
roop tumhaaree sangamaramar see,
phool see komal tan pyaare,
nakh se shikh saundary chhalakatee,
too hai jaan hamaaree,
kya likhoon main prem mein tere,
bol mere hamaraahee |3
prem agar ho dil mein to,
rab patthar mein bhee milata hai,
prem kare insaan to ye jag,
jannat jaisa dikhata hai,
bina prem ke jannat mein bhee,
daag najar aa jaata hai,
prem agar to andhe mein,
bhagavaan najar aa jaata hai,
main to paagal aankh ka andha,
toon hai nayan hamaaree,
kya likhoon main prem mein tere,
bol mere hamaraahee,
kya likhoon main prem mein tere,
bol mere hamaraahee..4
!!! madhusudan !!!

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51 thoughts on “Kalpna ki Udaan

  1. अरे अरे अरे ! क्या बात है, पहली चार पंक्ति पढ़ के ही नायिका धराशायी हो जाएगी 😜

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  2. कोमल लाल कपोल सुशोभित,
    अधरतले तील मतवाला,
    बड़ी-बड़ी आँखें कजरारी,
    होठ गुलाबी मधुशाला,

    ये चाँद पंक्तियाँ मेरे जहन को छू गई

    आप माहिर है शब्दों के खेल में…. बहुत खूब और उम्दा

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    1. आपने पढ़ा,तारीफ़ किया सुक्रिया साथ ही हौसला बढ़ाने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद आपका।

      Liked by 1 person

  3. क्या लिखूँ मै तेरे प्रेम में बोल मेरे हमराही। सचमुच आपकी रचना ने हमें विवश कर दिया। अब क्या लिखूँ मै मेरे पास शब्द नही है। बहुत ही उम्दा! Madhu Sir
    खुबसूरत लिखत महासय।आपके इन सुन्दर रचनाओं का राज क्या है?

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    1. इतना तारीफ़ सुनकर कोई उछल सकता है ——-बहुत खूब —-वैसे किसी भी लेखनी को सामने वाला बड़ा बनाता है साथ ही ऐसा कोई राज नहीं विकाशजी।सुक्रिया आपके बहुमूल्य कमेंट्स के लिए।

      Liked by 1 person

    1. कोई गलती नहीं भाई —–आभार आपका आपने बहुमूल्य समय देकर लेख को पढ़ा।

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  4. वाह भाई वाह क्या बात है। आपने कविता में
    तो प्रेम और सौंदर्य रस दोनों से परिपूर्ण कर दिया है। मैंने बिहारी की कविताओं में पढा था लेकिन आपने तो सौम्यता से वर्णन किया है। अब बारिश का मौसम है नाग मति के वियोग यानी नायिका का वियोग वर्णन कर लिख दीजिए।

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    1. सुक्रिया आपने बहुत बड़ी बात कह दी—–मैं तो लिखने का प्रयास करता हूँ लिखा जाता है

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      1. आप लिख सकते हो। इस लिए कहा है मैं झूठी तारीफ नहीं की। मैंने हिंदी साहित्य से M. A., p. H. D. किया है इसलिए सभी लेखकों और कवि और कविताओं को पढने का मौका मिला है ये मेरा अनुभव भी है।

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