Kalpna ki Udaan

Kalpna ki Udaan

धरती बन गयी कोरा कागज,
सागर बना स्याही,
क्या लिखूं मैं प्रेम में तेरे,
बोल मेरे हमराही |
किन किन गुण का गान करूँ मैं,
नख से शिख तक तेरे,
मेरे दिल में झांक के देखो,
तुम ही तुम हो मेरे,
केश तुम्हारे काले बादल,
मतवाले से बहते,
अपने संग संग मुझको भी वो,
मतवाला सा करते,
गर्म हवा शीतल बन जाता,
केश से जब टकराता,
भींगे केश बदन को लगते,
मन ब्याकुल हो जाता,
उन बिखरी जुल्फों में दिखता,
खिली हुयी फुलवारी,
क्या लिखूं मैं प्रेम में तेरे,
बोल मेरे हमराही |

बालों के लट परदे जैसे,
चाँद चमकता अंदर में,
जैसे बिजली आसमान में,
रूप चमकता दर्पण में,
शब्दरहित गुणगान करें क्या,
कर्ण सुशोभित कुण्डल का,
भौं की मैं गुणगान करूँ या,
भाल तिलक मनमोहक का,
कोमल लाल कपोल सुशोभित,
अधरतले तील मतवाला,
बड़ी-बड़ी आँखें कजरारी,
होठ गुलाबी मधुशाला,
आँख शरबती,केश घटा,
तू मय की भरी प्याली,
क्या लिखूं मैं प्रेम में तेरे,
बोल मेरे हमराही |

गर्दन जैसे एक सुराही,
चाल तुम्हारी मतवाली,
कमर लचकती ऐसे जैसे,
लचके लवंग की एक डाली,
बोल सुरीली सुन सब खोया,
हाथ हवा में लहराती,
कोयल दूर से तुझे निहारे,
गीत मधुर जब तुम गाती,
चाल देख नख लाल तुम्हारे,
हंस भी तुमपर दिल हारे,
रूप तुम्हारी संगमरमर सी,
फूल सी कोमल तन प्यारे,
नख से शिख सौंदर्य छलकती,
तू है जान हमारी,
क्या लिखूं मैं प्रेम में तेरे,
बोल मेरे हमराही |

प्रेम अगर हो दिल में तो,
रब पत्थर में भी दिखता है,
प्रेम करे इंसान तो जग ये,
जन्नत जैसा दिखता है,
बिना प्रेम के जन्नत में भी,
दाग नजर आ जाता है,
प्रेम अगर तो अंधे में,
भगवान् नजर आ जाता है,
मैं तो पागल आँख का अँधा,
तूं है आँख हमारी,
कागज़ बनी धरा छोटी,
कम सागर बना स्याही,
क्या लिखूं मैं प्रेम में तेरे,
बोल मेरे हमराही।

!!! मधुसूदन !!!

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37 thoughts on “Kalpna ki Udaan

  1. अरे अरे अरे ! क्या बात है, पहली चार पंक्ति पढ़ के ही नायिका धराशायी हो जाएगी 😜

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  2. कोमल लाल कपोल सुशोभित,
    अधरतले तील मतवाला,
    बड़ी-बड़ी आँखें कजरारी,
    होठ गुलाबी मधुशाला,

    ये चाँद पंक्तियाँ मेरे जहन को छू गई

    आप माहिर है शब्दों के खेल में…. बहुत खूब और उम्दा

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    1. आपने पढ़ा,तारीफ़ किया सुक्रिया साथ ही हौसला बढ़ाने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद आपका।

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  3. क्या लिखूँ मै तेरे प्रेम में बोल मेरे हमराही। सचमुच आपकी रचना ने हमें विवश कर दिया। अब क्या लिखूँ मै मेरे पास शब्द नही है। बहुत ही उम्दा! Madhu Sir
    खुबसूरत लिखत महासय।आपके इन सुन्दर रचनाओं का राज क्या है?

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    1. इतना तारीफ़ सुनकर कोई उछल सकता है ——-बहुत खूब —-वैसे किसी भी लेखनी को सामने वाला बड़ा बनाता है साथ ही ऐसा कोई राज नहीं विकाशजी।सुक्रिया आपके बहुमूल्य कमेंट्स के लिए।

      Liked by 1 person

    1. कोई गलती नहीं भाई —–आभार आपका आपने बहुमूल्य समय देकर लेख को पढ़ा।

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  4. वाह भाई वाह क्या बात है। आपने कविता में
    तो प्रेम और सौंदर्य रस दोनों से परिपूर्ण कर दिया है। मैंने बिहारी की कविताओं में पढा था लेकिन आपने तो सौम्यता से वर्णन किया है। अब बारिश का मौसम है नाग मति के वियोग यानी नायिका का वियोग वर्णन कर लिख दीजिए।

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    1. सुक्रिया आपने बहुत बड़ी बात कह दी—–मैं तो लिखने का प्रयास करता हूँ लिखा जाता है

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      1. आप लिख सकते हो। इस लिए कहा है मैं झूठी तारीफ नहीं की। मैंने हिंदी साहित्य से M. A., p. H. D. किया है इसलिए सभी लेखकों और कवि और कविताओं को पढने का मौका मिला है ये मेरा अनुभव भी है।

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