JHANSI KI RANI

JHANSI KI RANI

 

बिजली जैसे चमक रही थी,हांथों में उसकी तलवार,
झांसी की रानी थी सुनलो लक्ष्मीबाई की ललकार |

वीरों की धरती भारत में, वीर-धीर थी एक रानी,
मणिकर्णिका,लक्ष्मीबाई,नाम छबीली एक रानी,
भागीरथी माँ,पिता मोरोपंत,की संतान अकेली थी,
शास्त्र,शस्त्र की शिक्षा,बचपन में ही उसने लेली थी,
कानपूर की नानासाहेब की,मुँहबोली थी बहना,
बरछी, तलवारों के संग में,बचपन से ही था रहना,
चूड़ी के बदले हाथों में जिसकी सजती थी तलवार,
झांसी की रानी थी सुनलो लक्ष्मीबाई की ललकार |1

बड़ी हुयी फिर हुयी सगाई,झांसी के महराजा से,
मधुर मिलन लक्ष्मीबाई का गंगाधर महराजा से,
मगर भाग्य में पुत्र नहीं,एक पुत्र हुआ वो रहा नहीं,
गोद लिया एक पुत्र मगर,दुर्भाग्य अभी भी टला नहीं,
ग्यारह साल हुए शादी का,पति का साया छूट गया,
झांसी के किले पर मानो,एक बिजली सा टूट पड़ा,
डलहौजी अंग्रेज ने दत्तक पुत्र को राजा ना माना,
हड़पनीति के आगे रानी का भी एक नहीं माना,
छूट गया वो महल जहां था पति के यादों का संसार,
झांसी की रानी थी सुनलो लक्ष्मीबाई की ललकार |2

ईस्ट इंडिया नाम कंपनी,था आया बन ब्यापारी,
हममे था मतभेद बड़ा वो,बन बैठा था अधिकारी,
धूर्त बड़ा वो हम भोले थे,सबको एक समझते थे,
छल से जोड़ा हाथ फिरंगी,शासन हम पर करते थे,
ना ममता मजदूर से उसको,ना थी तरस किसानों पर,
बहनों की अस्मत लुटती थी,बीच भरी चौराहों पर,
जात-पात संग धर्म बंटा,हम कल टुकड़े रजवाड़ों में,
बंटे हुए हम लड़ते मिटते,अपने ही रखवालों में,
आपस का ये जंग फिरंगी का बन बैठा था हथियार,
झांसी की रानी थी सुनलो लक्ष्मीबाई की ललकार |3

कितनी गम में झांसी थी हम कैसे उसे बखान करूँ,
झाँसी की रानी के गम, गुस्से का क्या इजहार करूँ,
बचपन में थी सुनी कहानी वीर शिवाजी की गाथा,
नस-नस में अंगार जले थे,काल बनी थी एक बाला,
महिलाओं का फ़ौज बनाया,छुप-छुपकर अंग्रेजों से,
झांसी का वो मान बढ़ाया,छुप-छुपकर अंग्रेजों से,
उत्तर से दक्षिण,पूरब से पश्चिम भारत जलता था,
भाग फिरंगी भाग के डंके आसमान में बजता था,
सन सत्तावन याद रहेगा वीरों के बलिदानो से,
झांसी की हर गालियां गूंजे इंकलाब के नारों से,
एक साथ अंग्रेजो के कई वार को खाली करती थी,
बिजली सी तलवार गरजती,विजयमार्ग पर चलती थी,
अंग्रेजों के छूटे पसीने,खाई उसने हार पर हार,
झांसी की रानी थी सुनलो लक्ष्मीबाई की ललकार |4

मगर एक दुर्भाग्य ने घेरा,उनका घोड़ा रूठ गया,
दौड़-दौड़ कर थका बेचारा,प्राण-पखेरू उड़ गया,
जबतक घोड़ा रहा साथ में,छूना उनको मुश्किल था,
अगर फिरंगी पास में आते,जीना उसका मुश्किल था,
मगर नया घोडा था,एक नाले पर आकर ठिठक गया,
रानी की सपनो की दुनियाँ,नाले पर ही बिखर गया,
अंग्रेजों ने घेर लिया,एक साथ में उनपर वार किया,
नारी होकर रानी ने,हर वार का उचित जवाब दिया,
पर पीछे ह्यूरोज ने घेरा,पीठ पर उसके वार किया,
अंग्रेजो के वार से थककर,उसने जीवन हार दिया,
बाईस की थी उम्र मात्र पर जीते जी ना मानी हार,
झांसी की रानी थी सुनलो लक्ष्मीबाई की ललकार |5

अठारह सौ पैंतीस में जन्मी,सन सत्तावन छोड़ गयी,
जून महीना अट्ठारह को,हमसे नाता तोड़ गयी,
नारी का एक फ़ौज बना,नारी को उसने सिखलाया,
अबला नहीं तू ऐ नारी,खुद लड़कर उसने दिखलाया,
पुरुषों के तुम साथ चलो,संसार के भाग्य बिधाता हो,
काली,दुर्गा,खड्गधारिणी,तुम्ही सीता-राधा हो,
सजने की जब अभिलाषा,हाथों में चूड़ी सजा लेना,
अपनों पर संकट आये तब,झट से खडग उठा लेना,
धन्य थे वो माँ-बाप धन्य उस माटी ने जो जन्म दिया,
तुम्हें याद रखेंगे हरदम,देश का तुमने मान दिया,
भाग फिरंगी भाग की तेरी नारों पर जीवन दूँ वार,
झांसी की रानी थी सुनलो लक्ष्मीबाई की ललकार ,
झांसी की रानी थी सुनलो लक्ष्मीबाई की ललकार |6

!!! मधुसूदन !!!

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Advertisements

30 thoughts on “JHANSI KI RANI

    1. हौसला बढ़ाने एवं पसंद करने के लिए बहुत बहुत सुक्रिया आपका—वैसे मैंने कल आपका लिखा पढ़ा फिर लिखने का ख़याल आया।

      Liked by 1 person

  1. एक बार फिर वो पंक्तिया याद आ गई – खूब लड़ी मर्दानी वो तों झांसी वाली रानी थी
    बहुत सुन्दर सर वीरता और सूचनाओ का गठबंदन बहुत खूब

    Liked by 1 person

  2. सुन्दर अभिव्यक्ति लगा सच में इतिहास में खो गए।अमर इतिहास भारत का।बहुत खूब।

    Like

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s