Prem Pujari

Prem Pujari

परी नहीं हो इंद्रलोक की,
​चाह ना फूलकुमारी का,
चाहत है ना चाँद का मुझको,
तुम बिन जीना प्यारी क्या,
जब तक तू है साथ में मेरे,
तू हमसफ़र हमारी है,
तब तक कविता गान करेंगे,
जबतक जान हमारी है।

उपवन में हैं फूल खिले,
मकरंद भ्रमर को भाते हैं,
महक पुष्प की भौरों को भी,
अपनी ओर बुलाते हैं,
फूलों का रस ख़त्म भ्रमर का,
साथ ख़तम हो जाता है,
रस बिहीन फूलों के भौरें,
पास नहीं फिर जाता है,
ना भौरा मैं,फूल नहीं तू,
ना रस की चाहत मुझको,
तेरा मैं तू जान हमारी,
ख्वाहिश और नहीं मुझको,
जबतक चन्दा आसमान में,
या फिर सांस हमारी है,
तब तक कविता गान करेंगे,
जबतक जान हमारी है।

!!! मधुसूदन !!!

Advertisements

39 thoughts on “Prem Pujari

      1. आपकी कविताएँ होती ही पढ़ने लायक है,और आपकी कविताएँ पढ़ अपना सूधार करते है

        Like

      2. इतनी बड़ी तारीफ़ —-! कुछ ज्यादा हो रहा है मुकान्शु जी।ये आपका बड़प्पन है।सुक्रिया।

        Liked by 1 person

  1. एक एक कर, हर शब्द पढ़ेंगे,
    हर रचना आपकी न्यारी है,
    तब तक हम गुणगान करेंगे,
    जब तक जान हमारी है।

    श्रेठ कविवर के लिए मेरे तरफ से दो पंक्तियाँ, बहुत ही उत्तम रचना

    Liked by 1 person

    1. अरे अरे अरे —भाई साहब कैसे बोलूं मैं कवि नहीं हूँ ,अभी अभी तीन महीने से लिखना शुरू किया हूँ।बिलकुल नौसिखिया हूँ ऐसा बोलकर हमपर बोझ ना बढ़ाएं।बिंदास रहने दें।सुक्रिया इतने सुंदर कमेंट्स के लिए।

      Liked by 1 person

    1. कल्पना कहीं ना कहीं हक़ीक़त होता ही है—-हम सब किसी को देख –सुनकर कल्पना में डूब जाते है और बाकी का सब हाल कलम कह जाता है।सुक्रिया पसंद करने के लिए।

      Liked by 1 person

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s