Month: July 2017

Sawan Bahna ka

Sawan Bahna ka

Click here to read part..1 रंग-बिरंगी खुशियां सारी,सिमटी है इस माह में| भैया तेरी बहना बैठी है इंतेज़ार में। बोला था आएंगे अबकी,राखी के त्योहार में, भैया तेरी बहना बैठी है इंतेज़ार में।2 कहने को ये कच्चा धागा, धागे में संसार है, बहना का है सिमटा इसमें, भैया सारा प्यार है, झूठा है ये बादल … Continue reading Sawan Bahna ka

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Intejaar Sawan ka

Intejaar Sawan ka

आया सावन हम सब रहते जिसके इंतजार में, रंग-बिरंगी खुशियां सारी,सिमटी है इस माह में| नैन किसी की सावन के संग, झर-झर बहते रहती है, कब आएंगे बालम उसकी, पल-पल राह निरखती है, सखियाँ झूले नीम की डाली, गीत सुनाती सावन के, कोई सजकर द्वार खड़ी है, इंतजार में बालम के, साजन आये खुशिया लाये … Continue reading Intejaar Sawan ka

Karaagrih

Karaagrih

कारागृह में जन्म लिया, उसकी मैं कथा सुनाता हूँ, कृष्ण,कन्हैया,गोवर्धन भगवान की कथा सुनाता हूँ। सात-सात थे दरवाजे, जिनपर थे ताले जड़े हुए, एक से बढ़कर एक जहाँ पर, पहरेदार थे खड़े हुए, ऐसे कारागार में बन्दी, मात-पिता जंजीरों में, कैसा वह इंसान गर्भ में, क्या लिखा तकदीरों में, दुश्मन कैसा मथुरा का वह, शक्तिशाली … Continue reading Karaagrih

BHUKH

BHUKH

सेज सजी मखमल की फिर भी नींद नहीं है आती, थाल सजी छत्तीस ब्यंजन पर भूख नहीं ला पाती। आह निकलती निर्धन की, उस ब्यंजन से उस बिस्तर पर, भूख लगे कैसे धनिकों को, नींद लगे फिर मखमल पर, महलों में ना चैन किसी को, ना सुकून मिलता है, देख सको तो देख लो, निर्धन … Continue reading BHUKH

Siyaasat

Siyaasat

दया नहीं धर्म कहां प्यार होता है, मतलब सियासत का यार होता है। सपने,हंसी सब, पल भर का मेहमाँ, इंसाँ का ख्वाब, तार-तार होता है, मतलब सियासत का यार होता है। दोस्त का दोस्त भी, दोस्त है जहान में, प्रेम दया धर्म सब, रहता इंसान में, दुश्मन का दुश्मन यहां यार होता है, मतलब सियासत … Continue reading Siyaasat

Insan aur Singhasan

Insan aur Singhasan

Click here to read part ..3 तेरे ही कारण जग से यारा रार ठान ली, जब तूने ना समझा,अपनी मैं हार मान ली। मैं पत्थर से टकराता, जंगल मे राह बनाता, नामुमकिन है ना कुछ भी, मैं शोलों पर चल जाता, जग ने एक सुर से मेरी,जय-जयकार मान ली, जब तूने ना समझा मुझको मैं … Continue reading Insan aur Singhasan