SAMARPAN

SAMARPAN

ख़ुशी नहीं हम सिर्फ गम चाहते हैं,
उसे दे दो ख़ुशी जिसे हम चाहते हैं|

मैं हूँ चकोर मेरा चाँद कहीं और है,
आँखों में आँसू की बात कोई और है,
दिल में जो गम उसे हम चाहते है,
उसे दे दो ख़ुशी जिसे हम चाहते हैं|

गुलशन गमगीन,गुलदस्ते में गुल है,
हँसते गुलदस्ते में जकड़ा वो फूल है,
जीवन को थोड़ा सा कम चाहते है,
उसे दे दो ख़ुशी जिसे हम चाहते हैं।

सागर की लहरों सी आती है खुशियां,
किनारों को छूकर के जाती हैं खुशियां,
गम जबतलक मेरी मर्जी है संग में,
मगर अपनी मर्जी से आती खुशियां,
आती हैं खुशियां तो खिलते हैं फूल,
जाते ही खुशियों के चुभते हैं शूल,
ऐसे ही गुल को अब हम चाहते हैं,
उसे दे दो ख़ुशी जिसे हम चाहते हैं|

!!! मधुसूदन !!!

 

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32 thoughts on “SAMARPAN

  1. अच्छी प्रेमकविता के लिए आपको बधाई और नीचे हमारी चाहते हमारा प्रेम जो आपके लिए है मधुसुदन जी !

    हमारे लिए वो गुल हैं आप जिसे हम चाहते हैं , रब दे आपको सब खुशियाँ क्युकी हम चाहते हैं .

    Liked by 1 person

  2. Waah, kya khoob kaha apne “ख़ुशी नहीं हम सिर्फ गम चाहते हैं, उसे दे दो ख़ुशी जिसे हम चाहते हैं|”

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  3. गुलशन गमगीन गुलदस्ते में गुल है…. वाह क्या बात कही…बहुत ही अच्छी रचना

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  4. ख़ुशी नहीं हम सिर्फ गम चाहते हैं,
    उसे दे दो ख़ुशी जिसे हम चाहते हैं|

    bahut khub madhusudan ji har bar apki lekhni hamara dil jeet leti hai

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