Month: August 2017

Sathi Re

Sathi Re

Click here to read part..1 जब रूठा तू मुझे मनाती, गिरता जब भी मुझे उठाती, टूट गया तूँ छोड़ गई,कैसे खुद को समझाऊँ, बोल बता अब मेरे साथी, कैसे उम्र बिताऊं। जीवन से लड़ते मैं आया, हार कभी ना माना था, तेरे कारण ही सागर से, बचकर वापस आया था, घर आने की चाहत कलतक, … Continue reading Sathi Re

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Jindagi ke Rang 

Jindagi ke Rang 

जीवन है सतरंगी आ संग,इसके जश्न मनाले, एक-एक खो जाएंगे फिर,जो भी साथ हमारे। हाथ मे आया और कब खोया, लट्टू,गीली-डंडा, खेल कबड्डी कब आया, कब खोया हाथ से अंटा, पता नही कब कलम मिली कब छूट गया विद्यालय, पता नहीं कब यौवन आयी, कब आया मदिरालय, होठों से कब जाम लगा,साकी थे साथ हमारे, … Continue reading Jindagi ke Rang 

Katha Bhakt Prahlad ki

Katha Bhakt Prahlad ki

है राह कठिन पर सत्य प्रबल,पर्वत भी शीश झुकाता है, इंसान चला गर सत्य के पथ,रब बेबस चलकर आता है। ब्रम्हा से वर को प्राप्त किया, एक राजा नाम हिरणकश्यपु जनता के बीच उद्घोष किया, खुद को ही मान लिया स्वयंभू, जन-जन उसको भगवान कहे, आह्लादित वह शैतान हुआ, था झूठ की दुनियाँ में अंधा, … Continue reading Katha Bhakt Prahlad ki

Jindagi

Jindagi

गुड्डा ​मैं एक घरौंदे का, जिसकी तु प्यारी गुड़िया है, यादों में मेरी तू बसती, तुममे ही मेरी दुनियाँ है, तू रूठ गयी रब रूठ गया, था बना घरौंदा टूट गया, ये मान सका ना पागल दिल, सपनों का सागर सूख गया, कहते हैं सब मैं पागल हूँ, सब कहते तू अब नहीं रही, उस … Continue reading Jindagi

Insan ki Pukar

Insan ki Pukar

Image..Google धरती,अम्बर शुद्ध हवा,पानी फिर भी ना मंगल है, जहाँ नही हक जीने का निर्बल को,फिर वह जंगल है। जंगल मे जीव निकलते घर से, भूखे पेट को चैन कहाँ, क्या भूख मिटेगी या जीवन ही, जीव को इसकी खबर कहाँ, है सजग कान,आंखें चचल, खतरों से है अनभिज्ञ नहीं, है मगर बिबसता भोजन की, … Continue reading Insan ki Pukar

Sarhad

Sarhad

उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम, है दुश्मन के घाट-घाट, मेरे राम-रहीमा,………थाम ले हमरी बांह ……रे मोरे राम रहीमा………..थाम ले हमरी बांह।। ये धरती है राम का जिसने, रावण का सहार किया, भूल गयी दुनियां कृष्ना ने, यहीं से गीता ज्ञान दिया,2 इस पावन धरती पर अब तो, दुश्मन देखे झांक-झाँक, मेरे राम-रहीमा,………थाम ले हमरी बांह ……रे … Continue reading Sarhad

Tiranga Hamari Jaan

Tiranga Hamari Jaan

Image credit .google जब तलक है तिरंगा है शान मेरा,तेरे क़दमों मेंअर्पित है जान मेरा। यूँ तो टुकड़ों में कल आज भी हैं बंटे, धर्म जाति से ऊपर नहीं उठ सके, क्या हुआ क्षेत्र में हम हैं बिखरे हुये, हैं मगर इस तिरंगे में सिमटे हुये, इस महापर्व पर है शान मेरा,तेरे क़दमों में अर्पित … Continue reading Tiranga Hamari Jaan