Sawan Mahima

Sawan Mahima

Bhagwan_Shiv_Drinking_Poison.jpg

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आया सावन हम सब रहते जिसके इंतजार में,
रंग-बिरंगी खुशियां सारी,सिमटी है इस माह में|
कथा एक वेदों में वर्णित,
उसको आज सुनाता हूं,
एक माह सावन की महिमा,
क्या है उसे बताता हूँ,
इसी माह में देव-दनुज मिल,
सागर मंथन कर डाला,
रत्न कई निकले संग निकला,
भरा हुआ घट बिष-हाला,
त्राहि-त्राहि त्रिलोक मची संग,
देव-दनुज भयभीत हुए,
अतितीब्र थी बिष की ज्वाला,
देख सभी गमगीन हुए,
दूर किये संकट शिव-शंकर,
अड़भंगी,भोले,विश्वेश्वर,
कंठ में रख ली जहर कहाये,नीलकंठ संसार में,
रंग-बिरंगी खुशियां सारी,सिमटी है इस माह में|

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शिव भोले अवतरित हुए थे,
सावन माह में धरती पर,
अपने वे ससुराल थे आये,
सावन माह में धरती पर,
जल से हुआ स्वागत उनका,
जल से ही अभिषेक हुआ,
तब से अबतक हर सावन में,
शिवजी आते धरती पर,
सावन के इस माह की महिमा,
वेदों ने भी गाया है,
पार्वती माँ इसी माह में,
शिव-शंकर को पाया है,
कठिन तपस्या एक माह माँ,की थी सावन माह में,
रंग-बिरंगी खुशियां सच में,सिमटी है इस माह में|

मरकंडू एक ऋषि महान,
मार्कण्डेय उनकी संतान,
अल्प उम्र संतान की चिंता,
सोलह साल थी उनकी जान,
चिंता मात-पिता का जाना,
अल्प उम्र अपना वह जाना,
सावन में फिर तप की भारी,
यम की फांस भी उससे हारी,
मन्त्र सिद्धियां,अद्भुत पाया,
तीनो लोक में नाम कमाया,
दीर्घायु का वर देकर शिव,
मृत्यु,यम को मार भगाया,
नतमस्तक यमराज हुए, फिर शिव के उस वरदान से,
रंग-बिरंगी खुशियां सच में,सिमटी है इस माह में|

                                         Cont……..

Images credit…Google

!!! मधुसूदन !!!

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