IJEHAAR PYAR KA

IJEHAAR PYAR KA

तेरा गुस्सा क्या मुश्काना सब कमाल हो गया,
सच कहते हैं तुमसे यारा,हमको प्यार हो गया।

तुमको देखूँ लगता ऐसे,
चाँद जमी पर आया जैसे,
क्या तारीफ करूँ मैं तेरी,
दिल का हाल सुनाऊँ कैसे,
तेरे बादल जैसे बाल,
डिम्पल दिखती हँसते गाल,
मृगनयनी ये तेरी आंखे,
जैसे झील हो नैनीताल,
उसमे डूब गया मन मेरा,बेबस जान हो गया,
सच कहते हैं तुमसे यारा,हमको प्यार हो गया।

उंगली जब लट को सुलझाता,
उसमे इंद्रधनुष खिल जाता,
चूड़ी की खनखन में तेरी,
पागल मन मेरा खो जाता,
अब तो नींद नही रातों में,
ख्वाबों में शासन है तेरी,
खुलती जब भी मेरी पलकें,
अखियाँ ढूंढे सूरत तेरी,
देखो छोड़ दिया अभिमान,मैं तेरा दास हो गया,
सच कहते हैं तुमसे यारा,हमको प्यार हो गया।

         Click here to read part..2

!!! मधुसूदन !!!

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26 thoughts on “IJEHAAR PYAR KA

  1. super… bohot hi achhi kavita he apki

    तुम्हे नज़र न लगे अपने-बेगाने की,
    ज़रूरत है तुम्हे सबसे छिपाने की,

    आरजू है कि तुम हमारी हो जाओ,
    बहुत हसरत है तुम्हे सीने से लगाने की…

    Liked by 1 person

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