JEEVAN AUR SAMAAJ

JEEVAN AUR SAMAAJ

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हमने छोड़ा सबअभिमान,तुम्हारा दास हो गया,
सच कहते हैं तुमसे यारा,हमको प्यार हो गया।

उसकी प्रेम,गुजारिश,जिद ने,
हर बंधन को तोड़ दिया,
प्रेम के आगे बेबस बुलबुल,
खिड़की दिल का खोल दिया,
मद्धिम झोंका कब आंधी का,
रूप लिया कुछ पता नहीं,
बदल गयी दुनियाँ कब उसकी,
कैसे कुछ भी पता नही,
चहक उठी उसका गुलशन गुलजार हो गया,
एक दूजे बिन अब रह पाना,दुस्वार हो गया।

अरमानों का पंख लगा अब,
सपने अपनी बुनती है
अपने प्रेमी की बाहें,
जन्नत सी उसको लगती है,
इश्क चढ़ा परवान,
धर्म और जाति रोक नहीं पाया,
मात-पिता बेबस समाज,
रिश्ते को तोड़ नहीं पाया,
बेटी हुई बहिष्कृत घर से,
दिल से वह मजबूर हुई,
मंजिल तो मिल गयी मगर,
माँ-बाप से अपने दूर हुई,
मनमर्जी जीवन का दुश्मन परिवार हो गया,
मात-पिता बिन बुलबुल का,निकाह हो गया।

                              Cont……….

!!! मधुसूदन !!!

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