Month: October 2017

Smaran Lauh Purush ki/स्मरण लौह पुरुष की

Smaran Lauh Purush ki/स्मरण लौह पुरुष की

हम इंसानों में कोई खासियत हो ना हो,कमी निकालने की हुनर कूट-कूटकर भरी होती है। सामने अगर भगवान् आ जाएं कमियां हम उनमें भी ढूंढ लेते हैं। मगर कभी-कभी ऐसे हुनर को दरकिनार कर हमें उन युगपुरुषों को जरूर स्मरण करना चाहिए जिन्होंने देश की स्वाधीनता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। ऐसे ही … Continue reading Smaran Lauh Purush ki/स्मरण लौह पुरुष की

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Naari ka Dard

Naari ka Dard

कैसा ये संसार किया है, जुल्म का सीमा पार किया है, तेरी बिटिया,बहन सिसककर, तुम्हें जताने आयी है, बसकर जुल्म न सहना अब ये,तुझे बताने आयी है, बसकर जुल्म न सहनाअब ये ......। युग बदला इंसान बदल गए, गीताज्ञान किताब में रह गए, पश्चिमवादी सोंच में अब तो, नारी के सम्मान बदल गए, तड़प रही … Continue reading Naari ka Dard

Benakaab

Benakaab

ham hain shaanti ke pujaaree, jaise baal bramhachaaree, roop daity kyon badal ,ban gayee hai menaka .1 saara vishv hai hamaara ,ham hain vishv ke nivaasee, nahin bair hamen bair kyon, sikhaatee menaka .2 dekh shaanti ko adig,teree buddhi huyee ksheen, roop jang ka kyon chhal se,dikhaatee menaka.3 jan-jan hue trast, kiya roop too beebhats, … Continue reading Benakaab

KAISA PANCH/कैसा पंच

KAISA PANCH/कैसा पंच

जब नफरत दिल में भरे हुए, अजान सुनाकर क्या होगा, जब दिल में तेरे प्रेम नहीं, घँटे को बजाकर क्या होगा। संसार बनाया है जिसने, हमसब का भी निर्माण किया, हर जीव में जान बसी जिसकी, उसने ही हम में प्राण दिया, इतना जब हम ना समझ सके, पूजन भगवन का क्या होगा, जब दिल … Continue reading KAISA PANCH/कैसा पंच

Anndaata/अन्नदाता

Anndaata/अन्नदाता

गोरे बदन जब काले हो जाते, तन पर के कपड़े भी चिथड़े हो जाते, सूरज की ताप जब हार मान जाती है, तब जा के खेतों में पौध लहलाती है, तब जा के खेतों में पौध लहलाती है। खेतों में पौधों को सींचता है ऐसे, थाली में मोती सजाता हो जैसे, खून-पसीने से फसल जब … Continue reading Anndaata/अन्नदाता

Chhath Puja/छठ ब्रत

Chhath Puja/छठ ब्रत

हे एकमात्र सृष्टि के तूँ ही, मूर्तरूप भगवान, करूँ मैं तेरी पूजा, छठी मैया के साथ,करूँ मैं तेरी पूजा। हे सूर्यदेव है बिनती, कर दे कंचन काया, हे भ्राता छठी माँ के, कर दे निर्मल काया, तन जारूंगी मन शुद्ध, शुद्ध फल-फूल चढ़ाऊँ, हे दिनकर तुमको, सात सुप से अर्घ्य चढ़ाऊँ, सृष्टि तुमसे ही तेरे … Continue reading Chhath Puja/छठ ब्रत

Maa ka Pyaar

Maa ka Pyaar

आज इंसान अपनों से कोसों दूर रोजी-रोटी की जुगाड़ में चला जा रहा है,जहाँ अपने माँ बाप को चाहकर भी नहीं रख पाता। माँ-बाप को भी अपना गांव छोड़ा नहीं जाता।अचानक वह इंसान अपनी माँ की मृत्यु की खबर सुन तड़पने लगता है। अब आगे उसी की जुबानी------- कितने थे अंजान प्रेम से,आज ये हमने … Continue reading Maa ka Pyaar