Haldighati Ka Maidan (Part.5)

Click here to Read part..4

Image Credit : Google
पराधीन रहना ना जाना,
जीते जी वह हार ना माना,
त्याग सुख महलों की जिसने,खाई रोटी घास की,
दोहराता हूँ कथा वीर उस महाराणा प्रताप की|२|

थककर सलीम ने तोपों को आखिर में किया इशारा था,
गोलों की बारिस के आगे मेवाड़ी हुआ बेचारा था,
थे चार मुग़ल पर एक वीर फिर भी मुगलों पर हावी थे,
गोलों के बारिस के आगे बेबस दिखते मेवाड़ी थे,
राणा ने फिर हुंकार भरा सैनिक मरने को आन खड़ा,
है कहाँ छुपा अकबर ढूंढो,ढूंढों किस ओर है मान खड़ा,
जय मात भवानी नारों से,अंबर डोला जयकारों से,
नश-नश में बिजली दौड़ गयी,एकलिंग भरी हुंकारों से,
गोलों से सैनिक टकराये,मर मिटने को आगे आये,
गिरते मरते परवाह नहीं,पीछे हट जाना चाह नहीं,
राणा ने तबतक देख लिया हाथी पर उस गद्दार को,
सैनिक थे काफी घेर खड़े उस कुल कलंकी मान को,
पलभर की भी ना देर लगी,चेतक आँधी सा दौड़ गया,
वह चिर कलेजा पलभर में दुश्मन के बीचों बीच गया,
दल दुश्मन का सिर काट रहा,मुंडों से धरती पाट रहा,
था धन्य वीर वह भारत का था मस्तक राजस्थान की
दोहराता हूँ कथा वीर उस महाराणा प्रताप की|२|

6_555_072617124230

चेतक पलभर में दौड़ गया जँह मान सिंह था हाथी पर,
चेतक की टापें जा बरसी सिर पर पलभर में हाथी पर,
घायल था चेतक मगर शौर्य दिखलाया अपनी जान पर,
राणा ने साध निशाना भाला फेंक दिया था मान पर,
तब दुबक बचाई जान मान सिंह राणा के उस भाले से,
तब सहम गए थे मुग़ल फ़ौज उस धधक रहे अंगारे से,
देखा खतरे में मान पड़ा माधो सिंह धावा बोल दिया,
एक संग कई मुगलों ने राणा पर था हमला बोल दिया,
वह जंग पुरानी याद आयी अभिमन्यु पड़ा अकेला था,
इस चक्रब्यूह में मुगलों ने मिलकर राणा को घेरा था,
हुंकार भरा तब राणा ने,विकराल बना तब राणा ने,
कब मातृभूमि के रक्षक करते परवाह अपनी जान की,
दोहराता हूँ कथा वीर उस महाराणा प्रताप की|२|
दोहराता हूँ कथा वीर उस महाराणा प्रताप की|२|
!!! मधुसूदन !!!

Cont part….6

paraadheen rahana na jaana,
jeete jee vah haar na maana,
tyaag sukh mahalon kee jisane,khaee rotee ghaas kee,
doharaata hoon katha veer us mahaaraana prataap kee|2|

thakakar saleem ne topon ko aakhir mein kiya ishaara tha,
golon kee baaris ke aage mevaadee hua bechaara tha,
the chaar mugal par ek veer phir bhee mugalon par haavee the,
golon ke baaris ke aage bebas dikhate mevaadee the,
raana ne phir hunkaar bhara sainik marane ko aan khada,
hai kahaan chhupa akabar dhoondho,dhoondhon kis or hai maan khada,
jay maat bhavaanee naaron se,ambar dola jayakaaron se,
nash-nash mein bijalee daud gayee,ekaling bharee hunkaaron se,
golon se sainik takaraaye,mar mitane ko aage aaye,
girate marate paravaah nahin,peechhe hat jaana chaah nahin,
raana ne tabatak dekh liya haathee par us gaddaar ko,
sainik the kaaphee gher khade us kul kalankee maan ko,
palabhar kee bhee na der lagee,chetak aandhee sa daud gaya,
vah chir kaleja palabhar mein dushman ke beechon beech gaya,
dal dushman ka sir kaat raha,mundon se dharatee paat raha,
tha dhany veer vah bhaarat ka tha mastak raajasthaan kee
doharaata hoon katha veer us mahaaraana prataap kee|2|

chetak palabhar mein daud gaya janh maan sinh tha haathee par,
chetak kee taapen ja barasee sir par palabhar mein haathee par,
ghaayal tha chetak magar shaury dikhalaaya apanee jaan par,
raana ne saadh nishaana bhaala phenk diya tha maan par,
tab dubak bachaee jaan maan sinh raana ke us bhaale se,
tab saham gae the mugal fauj us dhadhak rahe angaare se,
dekha khatare mein maan pada maadho sinh dhaava bol diya,
ek sang kaee mugalon ne raana par tha hamala bol diya,
vah jang puraanee yaad aayee abhimanyu pada akela tha,
is chakrabyooh mein mugalon ne milakar raana ko ghera tha,
hunkaar bhara tab raana ne,vikaraal bana tab raana ne,
kab Matribhumi ke rakshak karte parwah apni jaan kee,
doharaata hoon katha veer us mahaaraana prataap kee|2|
doharaata hoon katha veer us mahaaraana prataap kee|2|
!!! madhusudan !!!

Cont part….6

Advertisements

18 thoughts on “Haldighati Ka Maidan (Part.5)

  1. नमन है गर्व है
    वीरता की शौर्य की
    अंकित है मानसपटल पे
    स्तंभ है साहस की
    महाराणा प्रताप जी को नमन
    आपकी लेखनी को नमन
    🙏🙏🙏

    Liked by 2 people

    1. सुक्रिया भाई आपने प्रथम कड़ी से अबतक हमारे मनोबल को बनाये रखा…..पुनः आभार आपका|

      Like

  2. फिर से आपने ओज, हिन्द शौर्य , देश भक्ति , हिन्द इतिहास का अदुतीय चित्रण किये ।।
    अति सुंदर …
    मन में एक उमंग, ओज, देश भक्ति और पौरुष का संचार कर गई आप की रचना ।।

    Liked by 1 person

    1. कविता थोड़ी लम्बी होती जा रही है मगर क्या करें कम शब्दों से काम नहीं चल रहा …….जितना लिख रहा हूँ उतना ही कम लग रहा है……सुक्रिया आप इतने लम्बे कविता के साथ हमारी हौसलाअफजाई कर रहे हैं…….पुनः धन्यवाद् आपका|

      Like

  3. आपकी लिखने की अंदाज सुभद्रा कुमारी च चौहान की तरह है…..
    मैं आपकी कविता …. पढ़कर पिघल गया हूं..

    Liked by 1 person

    1. आपके प्रशंसाभरे शब्दों को पढ़ मैं भी काफी भावविभोर हो गया हूँ……….मेरी कहाँ औकात जो सुभद्राकुमारी चौहान बन सकूं ये तो आपका सोच है जो आप ऐसा बोल रहे हैं……सुक्रिया आपने पसंद किया और सराहा |

      Liked by 1 person

  4. मन के व्यथा और चित्रण को शब्द देने के लिए वाक्य कभी छोटे कभी बड़े हो जाते है… किन्तु आप सदा ही विस्तार पूर्वक समस्त कड़ियों को बुनते हो कोई छूटता ही नहीं ।
    इस कारण से आप के रचना बड़ी हो जाती है …
    और सारे कड़ियों का यूँ विस्तृत और विस्तार से चित्रण करना हर किसी से संभव भी नहीं , किन्तु आप इसमें परांगत है ।
    आपको पढ़ने में अत्यधिक सिख और हिंद इतिहास की विस्तृत और विस्तार से जानकारी मिलती है ।
    अब एक प्रतीक्षा है हमे आपको सुनने का … कभी वो दिन भी अवश्य आयेगा ।।
    ।। जय हिंद ।।

    Like

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s