CHITKAAR/चीत्कार

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अगर जानते हम तेरा हस्र ऐसा तो,
पत्थर कलेजा बना लेते बिटिया,
अगर नर्क मिलता उसे भोग लेते,
मगर गर्भ में ही मिटा देते बिटिया,
दुसह दर्द से हम बचा लेते बिटिया।।
तेरे मौन लब बन्द आँखे तुम्हारी,
तड़प,वेदना,चीख कह जाती सारी,
कई दुष्टों के बीच नन्ही परी तूँ,
दुसह दर्द को यूँ ना बिटिया सही तूँ,
दरिंदे को रोकर मनाई भी होगी,
तड़प करके माँ को बुलाई भी होगी,
जमीं ना फ़टी ना फलक पास आया,
तड़प,चीख तेरी ना रब को सुनाया,
यहाँ रब नहीं हम अगर जान जाते,
तुम्हारी कुहुँक मेरी कानों में आते,
दरिंदों को आकर मिटा देती बिटिया,
दुसह दर्द से मैं बचा लेती बिटिया।।
अभी खिलखिलाती तुम्हारी हँसी थी,
पायल की छमछम से आँगन सजी थी,
दरिंदों की नजरों में कैसे चढ़ी तूँ,
अभी आ रही माँ ये कह कर गई तूँ,
तुम्हें क्या पता तेरे संग में हुआ क्या,
उमर खेल की खेल तुमसे हुआ क्या,
अगर जानते तुमको जाने ना देते,
जमाने की नजरों में आने ना देते,
अगर नर्क मिलता उसे भोग लेते,
मगर गर्भ में ही मिटा देते बिटिया,
तुम्हें दर्द से हम बचा लेते बिटिया।।
!!!मधुसूदन!!!

Agar jaanate ham tera hasr aisa to,
patthar kaleja bana lete bitiya,
agar nark milata use bhog lete,
magar garbh mein hee mita dete bitiya,
dusah dard se ham bacha lete bitiya..
tera maun lab,band aankhe tumhaaree,
tadap,vedana,cheekh kah jaatee saaree,
kaee dusht sang meree nanheen paree toon,
dusah dard ko yoon na bitiya sahee toon,
darinde ko rokar manaee bhee hogee,
tadap karake maan-maan chillaee bhee hogee,
jameen na fatee na phalak paas aaya
tadap,cheekh teree na rab ko sunaaya,
yahaan rab nahin ham agar jaan jaate,
teree cheekh kaanontalak mere aate,
darindon ko aakar mita detee bitiya,
dusah dard se main bacha letee bitiya..
abhee khilakhilaatee tumhaaree hansee thee,
chhamachham se paayal kee aangan bharee thee,
darindon kee najaron mein kaise chadhee toon,
abhee aa rahee maan ye kah kar gaee toon,
tumhen kya pata tere sang mein hua kya,
umar khel kee khel tumase hua kya,
agar jaanate tumako jaane na dete,
jamaane kee najaron mein aane na dete,
agar nark milata use bhog lete,
magar garbh mein hee mita dete bitiya,
dusah dard se ham bacha lete bitiya..
!!!madhusudan!!!

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28 thoughts on “CHITKAAR/चीत्कार

  1. विहंगम प्रस्तुति! समकालीन घटनाओं को विषयवस्तु बनाकर लयबद्ध करने में आपकी दक्षता सराहनीय है. शुभकामनायें

    Liked by 2 people

    1. धन्यवाद अभय जी ।सच कहा चाहने से हम कुछ नहीं लिख पाते मगर दिल को झकझोरनेवाली कोई दृश्य आंखों के सामने नाचती है फिर कलम से अपने आप आँसू बरसने लगती है।

      Liked by 1 person

    1. Ji Sir….Dil ko jb dard ho to dard hi niklega….Ye to sach hai ki jaanewale lautkar nahi aate magar unko to aisi sabak milana chaahiye ki aage ham sabhya kahe jaanewale lo kukritya karne ke pahle laakh baar sochen….

      Liked by 1 person

  2. वीभत्स घटनाओ का बेहद ह्रदय स्पर्शी चित्रण आत्माओ को झिंझोड़ने वाली प्रस्तुति

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  3. आपने मार्मिकता का बख़ूबी चित्रण कविता के माध्यम से दर्शाया है … आज ये दशा हो गई है कि बेटी के साथ बेटे को भी संस्कारों का पाठ पढ़ाना होगा

    Liked by 1 person

    1. बिल्कुल सही कहा और पढ़ाते भी हैं मगर कुछ परिवार ही संस्कारविहीन होते हैं।सुक्रिया आपका पसन्द करने और सराहने के लिए।

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