Kaisi Jindagi 

Kaisi Jindagi 

Image Credit : Google
आज भी ओ महक तेरी,याद बहुत आती है,
स्वेत वस्त्रों में,अरमान सुलग जाती है।
तुम हो तो,साड़ी,गहने,कपडे है
तुमसे ही दुनियाँ की मेरे सभी सपने है,
जानती थी पर,किश्मत ना जान सकी,
साबित्री थी पर खुद को ना पहचान सकी,
क्या करें मजबूर थी,तुमसे कोसो दूर थी,
आज सब कुछ है,बस तुम ही नहीं,
साड़ी,गहने,कपड़े,आज भी वही,
यकीन नहीं तो आकर देख ले,
दुल्हन बनी है कैसी,आलमारी को देख ले,
मुझपर तो आज अब,स्वेत रंग चढ़े हैं,
आलमीरा और दराज मेरे किस्मत पर हँसे हैं,
देखती हूँ गहने जिसे,तूने कभी छुआ था,
साडी के पल्लू में तेरा ही ख्वाब बुना था,
खोलूं मैं अलमीरा कैसे,दराज अब रुलाती है,
आज भी ओ महक तेरी,याद बहुत आती है।
ख्वाबों में कैसे,मैं आज मुस्कुरा लूँ,
कैसे मैं पल भर भी,तुमको भुला दूँ,
आँगन में कोठे पर देहरी और सेज पर,
खिड़की से देखूँ या देखूँ मैं मेज पर,
दर्पण में भी तेरी,तस्वीर नजर आती है,
स्वेत बस्त्रों में अरमान सुलग जाती है,
आज भी ओ महक तेरी,याद बहुत आती है,
!!!मधुसूदन!!!

Aaj bhee o mahak teree,yaad bahut aatee hai,
svet vastron mein,aramaan sulag jaatee hai.
tum ho to,sari,gahane,kapade hai
tumase hee duniyaan kee mere sabhee sapane hai,
jaanatee thee par,kishmat na jaan sakee,
saabitree thee par khud ko na pahachaan sakee,
kya karen majaboor thee,tumase koso door thee,
aaj sab kuchh hai,bas tum hee nahin,
sari,gahane,kapade,aaj bhee vahee,
yakeen nahin to aakar dekh le,
dulhan banee hai kaisee,aalamaaree ko dekh le,
mujhapar to aaj ab,svet rang chadhe hain,
aalameera aur daraaj mere kismat par hanse hain,
dekhatee hoon gahane jise,toone kabhee chhua tha,
saadee ke palloo mein tera hee khvaab buna tha,
kholoon main alameera kaise,daraaj ab rulaatee hai,
aaj bhee o mahak teree,yaad bahut aatee hai.
khvaabon mein kaise,main aaj muskura loon,
kaise main pal bhar bhee,tumako bhula doon,
aangan mein kothe par deharee aur sej par,
khidakee se dekhoon ya dekhoon main mej par,
darpan mein bhee teree,tasveer najar aatee hai,
svet bastron mein aramaan sulag jaatee hai,
aaj bhee o mahak teree,yaad bahut aatee hai,
!!!Madhusudan!!!

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52 thoughts on “Kaisi Jindagi 

  1. बहुत ही अच्छा लिखा है। एक से एक कवि हैं। मेरे जैसे मूर्खता कवि को लगता रहा है लेखनी की दुनिया में मैदान छोड़ घर में डायरी ही लिखना बेहतर है। जहां न लाइक न कॉमेट की जवाब देही न काल्पनिक दुनिया बस मुक्त भाव से लिखते जाओ।

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    1. नहीं नहीं आप भी बहुत बढ़िया लिखती हैं—-आपने बहुत ऊंचा बोल दिया ,अभी तो मैं सिख रहा हूँ। आपने पसंद किया कोटि कोटि आभार।

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    1. ये तो अपनी अपनी सोच है ।आपने पसंद किया अपना कीमती समय देकर प्रतिक्रिया ब्यक्त किया बहुत बहुत धन्यवाद आपका।

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      1. आपने इतना सराहना किया ,कोटि कोटि धन्यवाद ज्योती जी–वैसे हम सब एक परिवार की तरह एक दूसरे का सराहना करते है अच्छा है ।अगर कोई पोस्ट अच्छा ना लगे तो बताया जाए तब वो क्षण अतिउत्तम होगा। धन्यवाद।

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  2. रजनी जी का कमेंट बहुत ही अच्छा है।कभी कभी इन likes से दूर।और सर आपकी तारीफ क्या करें हर रचना एक से बढ़कर मोतियों सी खूबसूरत।

    Liked by 2 people

    1. क्या बात—इतनी तारीफ ये आपका सोच और बड़प्पन है। ऐसे ही प्रेम बनाये रखिये—-बहुत बहुत आभार आपका।

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