Category: Politics

RAAJNEET KA MARA DESH HAMARA

RAAJNEET KA MARA DESH HAMARA

Image Credit : Google किसको चुनूँ किसको छोडूं, किससे अपने रिस्ते जोड़ूँ, पता किया तो निकल गए दोनों मौसेरे भाई, हम बकरे से बदतर इनसे अच्छे हैं कसाई। लोकतंत्र में जनता पर, निर्भर है सत्ताधारी, यहाँ खड्ग पर मत है भारी, मत का भेद करा डाला, जातिवाद बढ़ा डाला, जहाँ विश्व का धर्म सुरक्षित, उसमे … Continue reading RAAJNEET KA MARA DESH HAMARA

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RAAJNEETI AUR INSAAN

RAAJNEETI AUR INSAAN

Images Credit : Google. दलगत राजनीत आज अरमाँ को तोड़ दी, हिन्दू,मुसलमान संग रिश्तों को जोड़ ली, किसको परवाह यहाँ देश और मान की, हमने भी आज अब इंसानियत है छोड़ दी, हिन्दू,मुसलमान संग रिश्तों को जोड़ ली।1 चीख रहा हिन्द मगर बहरों का राज है, छलनी है अंग-अंग किसको परवाह है, जाति और मजहब … Continue reading RAAJNEETI AUR INSAAN

Tadapta Insan/तड़पता इंसान

Tadapta Insan/तड़पता इंसान

Images Credit : Google कलेजा फट रहा माँ का कहीं मासूम रोता है, ये कैसा धर्म धरती का जहाँ भगवान सोता है। कहीं पर जात के झगडे, कहीं हम धर्म में उलझे, हुए बेसक बहुत विकसित, मगर दुविधा कहाँ सुलझे, उलझते नित गए नित अब यहाँ इंसान रोता है, ये कैसा धर्म धरती का कहाँ … Continue reading Tadapta Insan/तड़पता इंसान

Singhasan ke Matwale

Singhasan ke Matwale

Images credit : Google. बसकर अब ना तोड़ हमें,ऐ सिंघासन के रखवाले, नफरत अब ना घोल हमें ऐ सिंघासन के मतवाले|1 नफरत देखो बाँट रही है, मिलजुल सब सरकार, देख धरा को चाट रही है, अब तो जनता जाग, फैल गई है हममे तुममे, इसकी मायाजाल, देख सको तो देखो कैसी, मतवाले की चाल, अंदर,बाहर … Continue reading Singhasan ke Matwale

Siyaasat

Siyaasat

दया नहीं धर्म कहां प्यार होता है, मतलब सियासत का यार होता है। सपने,हंसी सब, पल भर का मेहमाँ, इंसाँ का ख्वाब, तार-तार होता है, मतलब सियासत का यार होता है। दोस्त का दोस्त भी, दोस्त है जहान में, प्रेम दया धर्म सब, रहता इंसान में, दुश्मन का दुश्मन यहां यार होता है, मतलब सियासत … Continue reading Siyaasat

Insan aur Singhasan

Insan aur Singhasan

Click here to read part ..3 तेरे ही कारण जग से यारा रार ठान ली, जब तूने ना समझा,अपनी मैं हार मान ली। मैं पत्थर से टकराता, जंगल मे राह बनाता, नामुमकिन है ना कुछ भी, मैं शोलों पर चल जाता, जग ने एक सुर से मेरी,जय-जयकार मान ली, जब तूने ना समझा मुझको मैं … Continue reading Insan aur Singhasan

Nafrat ki Aandhi

Nafrat ki Aandhi

शंखध्वनि, घंटे, अजान के, सुर में दुनियां नाच रही है, अपनी डफली छोड़कर देखो,मानवता चित्कार रही है। हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख,ईसाई, सब कहते सब भाई हैं, अल्लाह,ईश्वर,गॉड,गुरु में, फिर क्यों छिड़ी लड़ाई है, आहत है इन्सान यहां, हर घर पर आफत आयी है, सत्ता का संघर्ष मात्र, वर्चस्व की छिड़ी लड़ाई है, कैसा रूप लिया मानव,किस ओर ये … Continue reading Nafrat ki Aandhi