Sarhad

Sarhad

Image credit :Google उत्तर,दक्षिण,पूरब,पश्चिम है दुश्मन के घाट-घाट, मेरे राम-रहीमा, थाम ले हमरी बाँह ..रे मोरे राम रहीमा थाम ले हमरी बाँह। जिस धरती पर राम हुए जिसने रावण संहार किया, कृष्ना ने जिस धरती से दुनियाँ को गीता ज्ञान दिया,2 उस पावन धरती पर अब तो दुश्मन देखे झाँक-झाँक, मेरे राम-रहीमा, थाम ले हमरी … Continue reading Sarhad

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Sainik Ki Lalkaar

Sainik Ki Lalkaar

Image Credit :Google हे भारत माँ के राजतिलक,पालक खुद का अपमान ना कर, अब छदम युद्ध की ज्वाला में हम सैनिक को कुर्बान ना कर। हम भारत माँ के पुत्र हैं इसके, शान में कुछ भी कर जायें, हम भूल के अपनों के हर गम, खुद को न्योछावर कर जायें, आजाद,भगत हर एक सैनिक, फौलाद … Continue reading Sainik Ki Lalkaar

Mahangayee Maar Gayi

Mahangayee Maar Gayi

Image Credit :Google *जून 2017 की हृदयविदारक सच्ची घटना पर आधारित कविता।* Click hear to read part-1 महंगी ने ली ली फिर से जान एक किसान की, महंगी ने ली ली फिर से जान एक किसान की, सचमुच में मुश्किल में है जान अब किसान की, महंगी ने ली ली फिर से जान एक किसान … Continue reading Mahangayee Maar Gayi

Phir Bebas Ek Kisan

Phir Bebas Ek Kisan

Image Credit :Google *जून 2017 की हृदयविदारक सच्ची घटना पर आधारित कविता।* रात का गहरा अंधेरा,नर को एक तूफान घेरा, एक ऐसी रात आयी,देख ना पाया सवेरा।2 तीन एकड़ काश्तकारी, बाप ने दी जिम्मेवारी, चाँद सी दुल्हन मिली थी, चल रही थी बैलगाड़ी, दिन गुजरता बैल संग में, रात दामन चाँद संग में, रूखी-सुखी मेवे … Continue reading Phir Bebas Ek Kisan

JHANSI KI RANI

JHANSI KI RANI

Image Credit : Google बिजली जैसी चमक रही थी,हांथों में जिसकी तलवार, झांसी की रानी थी सुनलो लक्ष्मीबाई की ललकार। वीरों की धरती भारत में,वीर-धीर थी एक रानी, मणिकर्णिका,लक्ष्मीबाई,नाम छबीली एक रानी, भागीरथी माँ,पिता मोरोपंत की संतान अकेली थी, शास्त्र,शस्त्र की शिक्षा,बचपन में ही उसने ले ली थी, कानपूर की नानासाहेब की,मुँहबोली थी बहना, बरछी,तलवारों … Continue reading JHANSI KI RANI

Prem Lagan

Prem Lagan

Image Credit: Google धनवानों के सोने गहने,मुझ गरीब के तुम प्यारे, महल,अटारी उनके सपने,मेरे धन तो तुम प्यारे। धन दौलत की चाह किसी को, स्वर्ण जड़ित हीरे गहने, माणिक,मूंगा चाह किसी की, महल,अटारी के सपने, लाखों हैं श्रृंगार बदन के,मेरे गहने तुम प्यारे, पर्णकुटीर जन्नत जैसी जब साथ हमारे तुम प्यारे। बृन्दावन घनश्याम बसे, बसते … Continue reading Prem Lagan