DAGABAAJ YARA (Antim bhag)

DAGABAAJ YARA (Antim bhag)

Click here to read part..1 हमने जिनसे इश्क किया वो दगाबाज निकला, उनके दिल में भी एक,छोटा सा दिमाग निकला। पहले जी भर मैंने रोया, बिखरे लाखों ख्वाब जो बोया, जन्नत क्यों समझा मरघट को, कैसी डाल के नीचे सोया, अब भी हमदम पास खड़ी थी, हंसकर मुझको देख रही थी, वो नादान थी ये … Continue reading DAGABAAJ YARA (Antim bhag)

DAGABAAJ YARA

DAGABAAJ YARA

हमने जिनसे इश्क किया वो दगाबाज निकला, उनके दिल में भी एक छोटा सा दिमाग निकला, हमने जिनसे इश्क किया वो दगाबाज निकला। मैं था राही एक दिन, राह में थककर चूर हो गया, रास्ता रेत भरा था, सिर पर सीधा धुप हो गया, दिख गयी दूर पेड़ की डाली, थोड़ी आशा मन में जागी, … Continue reading DAGABAAJ YARA

Kashmakash

Kashmakash

जिंदगी जंग है,जंग है जिंदगी, क्या करे ना करे तंग है जिंदगी, है अनेक रास्ते एक को ढूंढता, जब से दुनिया में हैं रास्ते चुनता, हम समर्पण करें या लड़े जिंदगी, क्या करे ना करे तंग है जिंदगी | बात खाने की हो ब्यंजने हैं कई, धर्म,जाति कहें तो यहां हैं कई, शासनों के कई … Continue reading Kashmakash

Rakhi ki Laaj

Rakhi ki Laaj

पाँच-पाँच पतियों की रानी, पाँचो वीर सेनानी, आज तड़पती है,बीच सभा वह रानी, आग बरसती है,आँखों से बन पानी, आज तड़पती है,.....। देवर दुर्योधन था भुला, अपनी सब मर्यादा, गरज के बोला दुशासन से, मौन थे सारे राजा, जाओ केश पकड़कर लाओ, बीच सभा पांचाली, मेरी जंघा पर बैठाओ, खोल दो उसकी साड़ी, खेल की … Continue reading Rakhi ki Laaj

Saathi Re

Saathi Re

जबसे मैने होश सम्हाला, कदम गली में पहला डाला, कंधे पर जो हाथ पड़ा बन बैठा साथी रे, भूल नहीं सकते यारा,है याद सताती रे। याद हमें पत्थर की गोटी, याद है गिल्ली-डंडा, याद हमें वह साथी, जिसके साथ में खेले अंटा, लुक्का-छिपी,चोर-सिपाही, याद है खेल कबड्डी, भूल नहीं सकते वो साथी, जो बचपन का … Continue reading Saathi Re