Bewfa

Bewfa

क्या बात है...?क्या हुआ...? आज ऐसे क्यों देख रहे हो, इतने उदास क्यों हो--? वे सामने बैठे, हमसे सवाल करते रहे, हम मौन अपलक उन्हें, देखते रहे, दिल में हजारों सवाल, सुनामी की तरह सबकुछ, बहा ले जाने को तत्त्पर, जिसे मुश्किल से रोक हम, अंदर ही अंदर सिसकते रहे, कितना यकीन था इनपर, क्यों … Continue reading Bewfa

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Mahatvkanksha/महत्वकांक्षा

Mahatvkanksha/महत्वकांक्षा

मानव करता उत्तपात मगर, चट्टान पिघलते देखा है, होते हैं जब इंसान दुखी,तब मेघ बरसते देखा है| जलचर,नभचर संग जीव सभी, मानव का साथ निभाते हैं, पर खेद हमें अपनों पर है, जो इनको रोज मिटाते हैं, नदियां कहती आ पास मेरे, मीठे जल तुझे पिलाऊंगी, गैया कहती आ पास मेरे, मैं तुझमें यौवन लाऊंगी, … Continue reading Mahatvkanksha/महत्वकांक्षा

Gam ki Baaris

Gam ki Baaris

Image credit: Google ऐ मेघ बता क्या दर्द तुझे,जो तुम रोते हो रातों में, प्रियतम मेरे परदेस बसे, मैं रोती उनकी यादों में। मैं आंख मिचौली खेल रहा, चंदा संग दूर सितारों में, एक चीख उठी मैं ठिठक गया, चंदा संग दूर सितारों में, देखा मैं तुझे झरोखे में, थे आंख अश्क से भरे पड़े, … Continue reading Gam ki Baaris

Shabd kis kaam ke

Shabd kis kaam ke

Images credit: Google दिल में रहकर अनजान रहा, वो शब्द की कीमत क्या जाने, ना देख सका बहते आँसूं, अल्फाज भला क्या पहचाने। फिर क्यूँ लिखें जज्बातों को, कोरे कागज पर अश्कों से, हम क्यूँ छेड़ें दिल राग बता, कोरे कागज पर अश्कों से, रख पायेगा ये कागज क्या, जज्बात छलकते आंखों के, जब उसने … Continue reading Shabd kis kaam ke

Betiyan

Betiyan

बेटियाँ, बेटियाँ, बेटियाँ, आधी आबादी संसार की, जिसपर, कुछ संरक्षक धर्म और समाज के, पाँव में बेड़ी लगाया है, अस्तित्व जो पुरुषों की, उसको, घूंघट और बुर्का पहनाया है, वैसे तो कल भी, कुछ बेटियों को आजादी थी, बहुत सी बेटीयों पर आज भी, और कल भी, पुरुष मानसिकता हावी थी, बावजूद, जब-जब मौका मिला, … Continue reading Betiyan

Kuchh Kali Qaid Guldaste me

Kuchh Kali Qaid Guldaste me

Image credit:Google पुष्प महकती इठलाती थी, कभी शान से गुलशन में, किश्मत पर है वही सिसकती, आज कैद गुलदस्ते में, कलि बनी कब फूल न जाना, जा बैठी गुलदस्ते में, इठलाना,बलखाना सारा,भूल गयी गुलदस्ते में। खुशबु रखती पास महकती, जहां,कहीं भी वो जाती, अपने संग संग मरघट को भी, गुलशन सा है महकाती, मगर कद्र … Continue reading Kuchh Kali Qaid Guldaste me

Khatre men Kaun..?

Khatre men Kaun..?

Images credit: Google क्यों खतरा-खतरा चिल्लाते, फिरते हो रास्ते में, फुर्सत में देखो अंतर्मन, है कौन खतरे में, ना हिन्दू खतरे में है ना इस्लाम खतरे में, ऐ नफरत के सौदागर है इंसान खतरे में। था अमन भरा धरती पर, कितना नफरत फैलाया, क्या पाया मुड़कर देख, बना कैसा दुनियाँ सारा, हम ईद मनाते थे … Continue reading Khatre men Kaun..?