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Andhi Daud

Andhi Daud

जीवन सफर में मिलते हैं लाखों, सबको क्या अपना बनाता है कोई, हम सब मुशाफिर  हैं सुनी सड़क के, मंज़िल सफर में पाता है कोई । बचपन में अपना निवाला खिलाया, बाहों के झूले में जिसने झुलाया, हर जिद पूरा किया जिसने हंसकर, बुढ़ापे में उसको रूलाता है कोई , हम सब मुशाफिर  हैं सुनी … Continue reading Andhi Daud