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Benakaab

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हम हैं शांति के पुजारी, जैसे बाल ब्रम्हचारी, रूप दैत्य क्यों बदल ,बन गयी है मेनका । सारा विश्व है हमारा ,हम हैं विश्व के निवासी, नहीं बैर हमें बैर क्यों, सिखाती मेनका । देख शान्ति को अडिग,तेरी बुद्धि हुयी क्षीण, रूप जंग का क्यों छल से ,दिखाती मेनका। जन-जन हुए त्रस्त, किया रूप तू … Continue reading Benakaab