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DARD

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कोमल फूल सी एक कलि, मखमल के गलीचे को रोज भिगोती, दारुण दर्द छीपे दिल में,सब रात अँधेरी उजागर होती| बादल भी गरजे,बरसे, नदियाँ मिली बाँध को तोड़ी समंदर, देहरी बाँध न लांघ सकी, अबला ना गरज दिल खोल के रोती, प्रेम मगन दिन सास,ससुर संग, रात अँधेरी में सेज भिगोती, दारुण दर्द छीपे दिल … Continue reading DARD

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