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Desh-Drohi/देशद्रोही

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Image Credit: Google कुछ थे कल मतलबी आज भी हैं वही, स्वार्थ की कब्र पर मिट रही है जमीं, कितने नफरत में वे घिर गए है, कल भी बदले नहीं आज भी हैं वही। लोग आते रहे लूट जाते रहे, कितने जीवन को पल में मिटाते रहे, फिर भी एक दूसरे को झुकाने में हम, … Continue reading Desh-Drohi/देशद्रोही

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