Tag: Jal Sankat

KHOJ/खोज

KHOJ/खोज

Image Credit : Google जहाँ पर बिखरे होते खून, जहाँ पर राजा ना कानून, जहाँ एक दूजे से सब ऐठें, कैसे आज सभी संग बैठे, देखा शेर संग खरगोश, बैठे संग में चीता,गौर, देखा बेबस सबको तो बिल्ली घबराई, मानव का जग छोड़ के जंगल में थी आई। भोर हुयी तब निकल गए थे, घर … Continue reading KHOJ/खोज

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Kaisi Shreshthata/कैसी श्रेष्ठता

Kaisi Shreshthata/कैसी श्रेष्ठता

Image Credit :Google सब जीवों में श्रेष्ठ रे मानव, बन बैठे हो तुम क्यों दानव, होश में आ वरना नभ से अँगारे बरसेंगे, वो दिन दूर नही जब जल बिन हमसब तड़पेंगे, वो दिन दूर नही जब जल बिन हमसब तड़पेंगे। धरती पर आँधी सी बढ़ती,जनसंख्या का बोझ, सारे जीवनरक्षक पौधे,तिल-तिल कटते रोज, जल,नभ,भू के … Continue reading Kaisi Shreshthata/कैसी श्रेष्ठता