Tag: Jindagi ke Rang 

Sathi Re

Sathi Re

Click here to read part..1 जब रूठा तू मुझे मनाती, गिरता जब भी मुझे उठाती, टूट गया तूँ छोड़ गई,कैसे खुद को समझाऊँ, बोल बता अब मेरे साथी, कैसे उम्र बिताऊं। जीवन से लड़ते मैं आया, हार कभी ना माना था, तेरे कारण ही सागर से, बचकर वापस आया था, घर आने की चाहत कलतक, … Continue reading Sathi Re

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Jindagi ke Rang 

Jindagi ke Rang 

जीवन है सतरंगी आ संग,इसके जश्न मनाले, एक-एक खो जाएंगे फिर,जो भी साथ हमारे। हाथ मे आया और कब खोया, लट्टू,गीली-डंडा, खेल कबड्डी कब आया, कब खोया हाथ से अंटा, पता नही कब कलम मिली कब छूट गया विद्यालय, पता नहीं कब यौवन आयी, कब आया मदिरालय, होठों से कब जाम लगा,साकी थे साथ हमारे, … Continue reading Jindagi ke Rang 

Jindagi

Jindagi

गुड्डा ​मैं एक घरौंदे का, जिसकी तु प्यारी गुड़िया है, यादों में मेरी तू बसती, तुममे ही मेरी दुनियाँ है, तू रूठ गयी रब रूठ गया, था बना घरौंदा टूट गया, ये मान सका ना पागल दिल, सपनों का सागर सूख गया, कहते हैं सब मैं पागल हूँ, सब कहते तू अब नहीं रही, उस … Continue reading Jindagi