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Kaisi Jindagi 

Kaisi Jindagi 

Image Credit : Google आज भी ओ महक तेरी,याद बहुत आती है, स्वेत वस्त्रों में,अरमान सुलग जाती है। तुम हो तो,साड़ी,गहने,कपडे है तुमसे ही दुनियाँ की मेरे सभी सपने है, जानती थी पर,किश्मत ना जान सकी, साबित्री थी पर खुद को ना पहचान सकी, क्या करें मजबूर थी,तुमसे कोसो दूर थी, आज सब कुछ है,बस … Continue reading Kaisi Jindagi 

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