Tag: Kisaan

Anndaata/अन्नदाता

Anndaata/अन्नदाता

गोरे बदन जब काले हो जाते, तन पर के कपड़े भी चिथड़े हो जाते, सूरज की ताप जब हार मान जाती है, तब जा के खेतों में पौध लहलाती है, तब जा के खेतों में पौध लहलाती है। खेतों में पौधों को सींचता है ऐसे, थाली में मोती सजाता हो जैसे, खून-पसीने से फसल जब … Continue reading Anndaata/अन्नदाता

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Kisaan ki Byathaa

Kisaan ki Byathaa

आज अन्नदाता किसान मानसून से जुआ खेलते-खेलते अपना धैर्य खोते जा रहे हैं।उनमें से अधिकतर कर्ज में डूब जानवर से भी बदतर जिंदगी जीने को बेबस हैं।उन्हीं किसानों की बिबसता दर्शाने का एक छोटा प्रयास--- आसमान में बादल छाये,गुजर गया अब जेष्ठ,बैल हमारे बूढ़े हो गए,जोत रहे सब खेत, धनियाँ कैसे बुआउँ धान,कैसे जोतुं खेत,२ … Continue reading Kisaan ki Byathaa

KISAAN KAA JEEVAN

KISAAN KAA JEEVAN

भूख मिटाता कृषक जगत का,क़द्र ना उसका जाना रे, सदियाँ बीत गयी कितनी इंसान उसे ना माना रे| अतिबृष्टि और अनाबृष्टि के, साथ में लड़ता रोज किसान, मानसून भगवान् है जिसका, उसी ने कर दी मुश्किल जान, बिकसित देश की रेस में हम है, मंगल,चाँद की रेस में हम है, धड़कन बसती देश का जिसमें, … Continue reading KISAAN KAA JEEVAN