Tag: Kisaan

KISAAN KAA JEEVAN

KISAAN KAA JEEVAN

भूख मिटाता कृषक जगत का,क़द्र ना उसका जाना रे, सदियाँ बीत गयी कितनी इंसान उसे ना माना रे| अतिबृष्टि और अनाबृष्टि के, साथ में लड़ता रोज किसान, मानसून भगवान् है जिसका, उसी ने कर दी मुश्किल जान, बिकसित देश की रेस में हम है, मंगल,चाँद की रेस में हम है, धड़कन बसती देश का जिसमें, … Continue reading KISAAN KAA JEEVAN

Kisaan ki Byathaa

Kisaan ki Byathaa

आसमान में बादल छाये, गुजर गया अब जेष्ठ, बैल हमारे बूढ़े हो गए, जोत रहे सब खेत, धनियाँ कैसे बुआउँ धान, कैसे जोतुं खेत-2। हाथ का कंगन,कान के बाली, गिरवी रख दे गहने सारी, झट कहकर पल्लू में बाँधा, हाथ में गहने सब धर डाला, तड़प रहा पर मौन खड़ा था, कृषक बेचारा गौण पड़ा … Continue reading Kisaan ki Byathaa