Tag: Maa-Baap

Maa ka Pyaar

Maa ka Pyaar

आज इंसान अपनों से कोसों दूर रोजी-रोटी की जुगाड़ में चला जा रहा है,जहाँ अपने माँ बाप को चाहकर भी नहीं रख पाता। माँ-बाप को भी अपना गांव छोड़ा नहीं जाता।अचानक वह इंसान अपनी माँ की मृत्यु की खबर सुन तड़पने लगता है। अब आगे उसी की जुबानी------- कितने थे अंजान प्रेम से,आज ये हमने … Continue reading Maa ka Pyaar

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Maa

Maa

ऐ माँ बोल बता मुझको मै,तेरा क्या सम्मान करूँ, ममता,त्याग,तपस्या की माँ,कैसे मैं गुणगान करूँ। बचपन से तुमसे ही सीखा, सीख मैं कितना बतलाऊँ, कितना प्यार किया तुम मुझको, कैसे उसको दुहराऊं, मुझे खिलाती फिर तू खाती, मेरे हक में तू लड़ जाती, दर्द कभी हो मुझको माँ फिर, रात तुम्हारी दिन बन जाती, सच … Continue reading Maa

Rishtey

Rishtey

जब से है दुनियाँ जब से है हम, हमसे है रिश्ते रिश्तों से हम, हम से ही बनते बिगड़ते हैैं रिश्ते, किसको कहें कैसे मिटते हैं रिश्ते, दिमाग से बने रिश्ते कभी टिकटे नहीं, दिल से बनें रिश्ते कभी मिटते नहीं, वैसे तो मिटानेवाले कुछ भी मिटा देते हैं, दूध का कर्ज,माँ का दर्द भुला … Continue reading Rishtey

Maa-Baap

Maa-Baap

कितना कष्ट होता है मिहनत से कमाने में, बिलकुल ही अनजान थे हम पापा के जमाने में। हो गयी है ज्ञान जो कहानी घटी मेले में, मेरी एक मुश्कान पर लुटायी पैसे मेले में, कितनी थी शरारतें कितनी ख्वाहिशें हमारी थी, मेले के सामान सारे नज़रों में उतारी थी, कंधे पे सवार जैसे मेला ही … Continue reading Maa-Baap