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MILAN

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सावन आता साल में जैसे वैसे प्रियतम आते, सावन रहता एक माह वे एक प्रहर में जाते । आने का पल आज चहकती, दरवाजे को खोल खड़े, खिड़की,परदे,उपवन,मौसम, साथ हमारे झूम उठे, प्रियतम आजा देर करो ना, जाने का पल है निश्चित, सजी हुई फुलवारी बिचलित, क़दमों में आ है अर्पित। बिरह साल का मिलन … Continue reading MILAN

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