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Mrigtrishna/Pyaasi Jindagi

Mrigtrishna/Pyaasi Jindagi

जिनके घर कच्चे है महल को दूर से देख तरसते हैं, उनको क्या मालुम वहाँ पर हर दिन आंसू बहते है| उनको क्या मालुम वहाँ पर हर दिन आंसू बहते है।। देख़ लिया दौलत महलों का, मन की त्रिसना ना देखा, हँसी, ठिठोली देखी उनकी अंतर्द्वन्द नहीं देखा, किसी को डर है चोर, किसी को … Continue reading Mrigtrishna/Pyaasi Jindagi