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Naari ka Dard

Naari ka Dard

कैसा ये संसार किया है, जुल्म का सीमा पार किया है, तेरी बेटी,बहन सिसककर, तुम्हें जताने आयी है, बसकर जुल्म न सहना अब ये तुझे बताने आयी है, बसकर जुल्म न सहनाअब ये ......| युग बदला इंसान बदल गए, गीताज्ञान किताब में रह गए, पश्चिमवादी सोंच में अब तो, नारी के सम्मान बदल गए, देखो … Continue reading Naari ka Dard