Tag: Naari Ka Dard

Naari ka Dard

Naari ka Dard

कैसा ये संसार किया है, जुल्म का सीमा पार किया है, तेरी बिटिया,बहन सिसककर, तुम्हें जताने आयी है, बसकर जुल्म न सहना अब ये,तुझे बताने आयी है, बसकर जुल्म न सहनाअब ये ......। युग बदला इंसान बदल गए, गीताज्ञान किताब में रह गए, पश्चिमवादी सोंच में अब तो, नारी के सम्मान बदल गए, तड़प रही … Continue reading Naari ka Dard

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Beti ki Kahani usi ki Jubani

Beti ki Kahani usi ki Jubani

एक ऐसी बेटी की कहानी जो शादी के बाद एक माह ससुराल का जुल्म सहन कर मायके आती है, माँ-बाप उसके दुख को सुन दुखी न हो जाएं ये सोच वह अपने दर्द को छुपा लेती परन्तु गौना कराने दरवाजे पर आये लोभी ससुराल पक्ष को देख उसके धैर्य की सीमा टूट पड़ती है...... आगे … Continue reading Beti ki Kahani usi ki Jubani

औरत /Women

औरत /Women

औरत तेरी यही कहानी | प्रेम का सागर दिल है,आँखों में है दर्द का पानी, औरत तेरी यही कहानी | बिटिया, बहन, बहु भी तू है, आँगन की शोभा भी तू है, वात्सल्य की अबिरल धारा,जग-जननी जगदम्बा तू है, तुमसे काशी,काबा तुमसे, गिरिजाघर, गुरुद्वारा तुमसे, अल्लाह,ईश्वर,गॉड का जिसने,ज्ञान दिया ओ जन्मा तुमसे, तेरी आँचल में … Continue reading औरत /Women

Talaaq ek Abhishaap

Talaaq ek Abhishaap

सादगी से भरी, खुबशुरत परी, तेरी गुलशन की हूँ, मैं भी एक कली, देख मौला ये क्या हो गया है, मेरा जीवन सजा हो गया है, हाय जीने को अब क्या बचा है | कितना मिन्नत किया, अब्बा ने हाँ किया, फिर निकाह हो गयी, मुझको सौहर मिला, कितनी खुशियां थी कितने हसीं ख्वाब थे, … Continue reading Talaaq ek Abhishaap