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Ristey

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जब से है दुनियाँ जब से है हम, हमसे है रिश्ते रिश्तों से हम, हम से ही बनते बिगड़ते हैैं रिश्ते, किसको कहें कैसे मिटते हैं रिश्ते, दिमाग से बने रिश्ते कभी टिकटे नहीं, दिल से बनें रिश्ते कभी मिटते नहीं, वैसे तो मिटानेवाले कुछ भी मिटा देते हैं, दूध का कर्ज,माँ का दर्द भुला … Continue reading Ristey

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