Tag: Rup Saundarya

Kalpna ki Udaan

Kalpna ki Udaan

धरती बन गयी कोरा कागज, सागर बना स्याही, क्या लिखूं मैं प्रेम में तेरे, बोल मेरे हमराही | किन किन गुण का गान करूँ मैं, नख से शिख तक तेरे, मेरे दिल में झांक के देखो, तुम ही तुम हो मेरे, केश तुम्हारे काले बादल, मतवाले से बहते, अपने संग संग मुझको भी वो, मतवाला … Continue reading Kalpna ki Udaan

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