Tag: UrmilaPatra of Ramayna

Urmila ki Dasha

Urmila ki Dasha

Click here to read part-1 सजी ऐसी अवध नगरी,की दुल्हन भी नहीं सजती, लखन, सिया,राम आये हैं,ख़ुशी कहते नहीं बनती। महल का एक कोना है, जहाँ पत्थर की एक मूरत, बिरह की आग में जलती, किसी की राह है तकती हैं आँखे उसकी पत्थर सी, जुबाँ खामोश हैं जिसकी, है स्वागत गान में शामिल,उर्मिला नाम … Continue reading Urmila ki Dasha

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Urmila Patra of Ramayna

Urmila Patra of Ramayna

बैदेही की बहन उर्मिला, की मैं कथा सुनाऊँ कैसे, चौदह वर्ष की बिरह,वेदना,त्याग,तपस्या गाउँ कैसे| अभी-अभी तो गुलशन में आया बसंत का मेला था, फूल बनी ओ खिली ही थी की,बिरह ने डाला डेरा था, प्रियतम था यमराज बना, सन्देश सुनाने आया, बिना प्राण के देह ये कैसा, समझाने था आया, राम सिया के साथ … Continue reading Urmila Patra of Ramayna