Naari ka Dard

Naari ka Dard

कैसा ये संसार किया है, जुल्म का सीमा पार किया है, तेरी बेटी,बहन सिसककर, तुम्हें जताने आयी है, बसकर जुल्म न सहना अब ये तुझे बताने आयी है, बसकर जुल्म न सहनाअब ये ......| युग बदला इंसान बदल गए, गीताज्ञान किताब में रह गए, पश्चिमवादी सोंच में अब तो, नारी के सम्मान बदल गए, देखो … Continue reading Naari ka Dard

Kisaan ki Byathaa

Kisaan ki Byathaa

आसमान में बादल छाये, गुजर गया अब जेष्ठ, बैल हमारे बूढ़े हो गए, जोत रहे सब खेत, धनियाँ कैसे बुआउँ धान, कैसे जोतुं खेत-2। हाथ का कंगन,कान के बाली, गिरवी रख दे गहने सारी, झट कहकर पल्लू में बाँधा, हाथ में गहने सब धर डाला, तड़प रहा पर मौन खड़ा था, कृषक बेचारा गौण पड़ा … Continue reading Kisaan ki Byathaa

Apna Gaon

Apna Gaon

कितना प्यारा था अपना जहान यारो, कहाँ छोड़ आए अपना ओ गांव यारों । कितना भटके हैं हम,फिर भी तरसे है मन, हर ख़ुशी है मगर कितना तन्हा हैं हम, एक डब्बे में सिमटा जहान यारो, कहां छोड़ आए अपना ओ गांव यारो। आम अमरुद की डाली कहाँ खो गयी, देख होठों की लाली कहाँ … Continue reading Apna Gaon

Maa Bharti

Maa Bharti

हैं दोनों ही संतान मेरे, एक वे भी हैं एक तुम भी हो, हो दोनों ही अरमान मेरे एक वे भी हैं एक तुम भी हो। एक खून की होली खेल गए, जंजीर गुलामी तोड़ गए, माँ के आंसू के बदले में, हंसकर शूली पर झूल गए, एक रोज रुलाया करते हैं, अपनों पर हमला … Continue reading Maa Bharti

Madiraalay

Madiraalay

हम सब शराबी, दुनियां एक मयखाना है, किसी को नशा किसी को,नशे का बहाना है, वैसे तो दो घुट पीनेवाले,पीकर बहक जाते हैं, देखते ही देखते उनके, जाम बदल जाते है, गिरते हैं खुद वे लड़खड़ाकर मयखाने में जश्ने संसार मय को, दोषी बना जाते है, मंजर अजीब देखा दुनियां के मैखाने में, कितने बेचैन … Continue reading Madiraalay

Talaaq ek Abhishaap

Talaaq ek Abhishaap

सादगी से भरी, खुबशुरत परी, तेरी गुलशन की हूँ, मैं भी एक कली, देख मौला ये क्या हो गया है, मेरा जीवन सजा हो गया है, हाय जीने को अब क्या बचा है | कितना मिन्नत किया, अब्बा ने हाँ किया, फिर निकाह हो गयी, मुझको सौहर मिला, कितनी खुशियां थी कितने हसीं ख्वाब थे, … Continue reading Talaaq ek Abhishaap

Apnaapan

Apnaapan

प्रेम हमने किया,तुमको दिल दे दिया, तुम कहाँ हो तेरे बिन ना लागे जिया, दर्द कितना दिया दिल में बस के, क्या मिला तुमको राहें बदल के। हम अकेला थे दुनियां हंसी थी, गर्म रेतों में भी कुछ नमीं थी, तुम पवन बन चले, साथ लेकर उड़े, छोड़ अपनों को हम,तेरे संग चल दिए, क्यों … Continue reading Apnaapan